बेलछी प्रखंड के तत्कालीन सीओ पर विभागीय कार्रवाई, मंत्री के अनुमोदन पर आरोप पत्र जारी
बिहार सरकार ने प्रशासनिक शिथिलता पर अधिकारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। वरीय अधिकारियों से दुर्व्यवहार और बैठकों से गायब रहने समेत अन्य मामले को लेकर पटना जिले के बेलछी के तत्कालीन सीओ के खिलाफ आरोप पत्र जारी कर दिया है....
Patna : बिहार सरकार ने प्रशासनिक जवाबदेही और अनुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। पटना जिले के बेलछी प्रखंड के तत्कालीन अंचल अधिकारी (सीओ) पियूष मिश्रा के खिलाफ सरकार ने औपचारिक रूप से विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है। विभागीय मंत्री द्वारा संचिका पर अनुमोदन दिए जाने के बाद 8 जुलाई 2026 को उनके विरुद्ध गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं से जुड़ा आरोप पत्र (चार्जशीट) जारी कर दिया गया है।
वरीय अधिकारियों से दुर्व्यवहार और बैठकों से गायब रहने का गंभीर आरोप
जारी किए गए आरोप पत्र के अनुसार, तत्कालीन अंचल अधिकारी पियूष मिश्रा पर सेवा नियमावली के उल्लंघन के कई गंभीर आरोप हैं। उन पर अपने से वरीय अधिकारी यानी भूमि सुधार उपसमाहर्ता (DCLR) के साथ अभद्र व अमर्यादित दुर्व्यवहार करने का आरोप है। इसके साथ ही वे बिना किसी पूर्व सूचना या सक्षम प्राधिकार की अनुमति के महत्वपूर्ण प्रशासनिक बैठकों से लगातार अनुपस्थित रहते थे, जिसे अनुशासनहीनता माना गया है।
आदेशों की अवहेलना और वित्तीय नियमों की अनदेखी का मामला आया सामने
विभागीय जांच के दायरे में अधिकारी द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों के दिशा-निर्देशों और सरकारी आदेशों की लगातार की गई अवहेलना भी शामिल है। इसके अलावा वित्तीय मोर्चे पर भी गंभीर लापरवाहियां उजागर हुई हैं। आरोप है कि उन्होंने सरकारी नियमों को ताक पर रखकर न तो कैश बुक (नकद बही) पर समय से हस्ताक्षर किए और न ही तय प्रक्रिया के तहत सरकारी खातों का लेखा सत्यापन (ऑडिट वेरिफिकेशन) कराया।
आवास में रहने के बावजूद उठाया एचआरए, अनुशासनिक कार्रवाई शुरू
अधिकारी पर लगे आरोपों में एक बड़ा मामला सरकारी राजस्व को क्षति पहुंचाने का भी है। उन पर आवंटित सरकारी आवास में निर्धारित समय सीमा से अधिक अवधि तक अवैध रूप से रहने के बावजूद नियम विरुद्ध तरीके से मकान किराया भत्ता (HRA) का लाभ लेने का आरोप है। इस वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ी को देखते हुए विभाग द्वारा उनके खिलाफ वर्तमान में कड़ी अनुशासनिक कार्रवाई संचालित की जा रही है।
जांच रिपोर्ट आने के बाद तय होगा दंड, अधिकारियों में हड़कंप
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, फिलहाल आरोपी अधिकारी के खिलाफ केवल जांच और अनुशासनिक प्रक्रिया शुरू की गई है और अभी किसी अंतिम दंड या निलंबन पर फैसला नहीं हुआ है। विभाग का कहना है कि पूरी विभागीय जांच रिपोर्ट आने और गुण-दोष के आधार पर ही आगे की सख्त दंडात्मक कार्रवाई तय की जाएगी। सरकार के इस कड़े कदम से लापरवाह अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया है।

वंदना की रिपोर्ट