Revenue Dept News - बिहार में टोपोलैंड और बकास्त भूमि का होगा सर्वे, उपमुख्यमंत्री ने बुलाई हाई-प्रोफाइल बैठक

बिहार में टोपोलैंड और बकास्त भूमि की पहचान के लिए उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने 10 अप्रैल को समीक्षा बैठक बुलाई है। सभी जिलों से असर्वेक्षित भूमि की रिपोर्ट मांगी गई है।

Revenue Dept News - बिहार में टोपोलैंड और बकास्त भूमि का होग

Patna - राज्य सरकार ने बिहार में मौजूद टोपोलैंड, बकास्त और अन्य असर्वेक्षित भूमि के सर्वेक्षण की प्रक्रिया तेज कर दी है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि इन जमीनों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने और उनके उपयोग के लिए ठोस नीति बनाने हेतु यह सर्वेक्षण अनिवार्य है। वर्तमान में राज्य के पास ऐसी जमीनों का कोई व्यवस्थित डेटा उपलब्ध नहीं है।

सभी जिलों से मांगी गई असर्वेक्षित जमीनों की सूची

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर सचिव आजीव वत्सराज ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों (समाहर्ताओं) को पत्र भेजकर अपने-अपने क्षेत्रों में टोपोलैंड और असर्वेक्षित भूमि की पहचान करने का निर्देश दिया है। जिलों को एक निर्धारित प्रपत्र में इन जमीनों की विस्तृत रिपोर्ट शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा गया है ताकि राजस्व अभिलेखों को अपडेट किया जा सके।

10 अप्रैल को होगी विभागीय समीक्षा बैठक

उपमुख्यमंत्री ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव को प्रत्येक जिले की रिपोर्ट की समीक्षा करने का निर्देश दिया है। इस महत्वपूर्ण विषय पर 10 अप्रैल 2026 को एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में टोपोलैंड की वर्तमान स्थिति की समीक्षा होगी और भूमि प्रबंधन को लेकर भविष्य की रणनीति तय की जाएगी।

विवादरहित और पारदर्शी व्यवस्था बनाने का लक्ष्य

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि सरकार का प्रारंभिक उद्देश्य विभागीय नियमों को व्यावहारिक, विवादरहित और पारदर्शी बनाना है। कई स्थानों पर ऐसी जमीनें हैं जिनका विधिवत सर्वेक्षण नहीं हुआ है या जिनकी प्रविष्टि अभिलेखों में स्पष्ट नहीं है। सही पहचान होने से भूमि प्रबंधन अधिक प्रभावी होगा और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में आसानी होगी।

भूमि विवादों के समाधान में मिलेगी मदद

सरकार का मानना है कि टोपोलैंड और असर्वेक्षित भूमि का दस्तावेजीकरण होने से भविष्य में भूमि संबंधी विवादों में भारी कमी आएगी। इसके साथ ही, सार्वजनिक उपयोग और विकास कार्यों के लिए भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने में भी सहूलियत होगी। अधिकारियों को इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया है।