Bihar Ganga Path Project: विकास के लिए सदियों पुराने पेड़ एक-एक कर हो रहे खत्म , जेपी गंगा पथ से जुड़ी फोरलेन सड़क ने बढ़ाई उम्मीदें, पेड़ों की कटाई से पर्यावरण पर मंडराने लगा ये संकट

Bihar Ganga Path Project: भद्रघाट से लेकर दीदारगंज तक गंगा किनारे बन रही फोरलेन सड़क अब पटना सिटी के लोगों के लिए विकास की नई राह मानी जा रही है।...

Development vs Green Cover JP Ganga Path Road Sparks Debate
सदियों पुराने पेड़ एक-एक कर हो रहे खत्म- फोटो : social Media

Bihar Ganga Path Project: भद्रघाट से लेकर दीदारगंज तक गंगा किनारे बन रही फोरलेन सड़क अब पटना सिटी के लोगों के लिए विकास की नई राह मानी जा रही है। जेपी गंगा पथ के समानांतर यह सड़क न सिर्फ यातायात का दबाव कम करेगी, बल्कि अशोक राजपथ के भीषण जाम से भी बड़ी राहत देने का दावा किया जा रहा है। इससे ईंधन की बचत, समय की बचत और प्रदूषण में कमी जैसी सुविधाएं मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

हालांकि इस विकास परियोजना के बीच पर्यावरण को लेकर गंभीर चिंता भी सामने आई है। सड़क निर्माण के लिए गंगा किनारे लगे दो दर्जन से अधिक हरे-भरे पेड़ों की कटाई की गई है। भद्रघाट, महावीर घाट, चित्रगुप्त मंदिर परिसर, खाजेकलां और महाराज घाट जैसे इलाकों में पीपल और बरगद जैसे विशाल वृक्षों को भी काटा गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह दृश्य मन को व्यथित करने वाला है, क्योंकि सदियों पुराने पेड़ एक-एक कर खत्म होते जा रहे हैं।

अधिकारियों के अनुसार, यह पेड़ वन विभाग की अनुमति के बाद नियमानुसार काटे गए हैं। लेकिन पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि विकास के नाम पर हरियाली की यह कीमत भविष्य में भारी पड़ सकती है। पहले भी स्थानीय स्तर पर यह मांग उठती रही है कि बड़े पेड़ों को काटने के बजाय उन्हें स्थानांतरित करने का प्रयास किया जाए, ताकि पर्यावरण संतुलन बना रहे।

लोगों का कहना है कि भीषण गर्मी और बढ़ते प्रदूषण के इस दौर में पेड़ों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे में हरियाली का लगातार घटता दायरा आने वाले समय में पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। अब मांग उठ रही है कि सड़क निर्माण पूरा होने के बाद दोनों ओर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कर हरियाली को फिर से बहाल करने की ठोस योजना लागू की जाए।

इसी बीच मोतिहारी से जुड़ा एक अलग मामला भी चर्चा में है, जहां 24.91 लाख रुपये की बरामदगी और कथित 35 लाख रुपये रिश्वत के आरोपों की जांच ईओयू और एसआईटी द्वारा तेज कर दी गई है। दोनों मामलों ने प्रशासनिक व्यवस्था और विकास कार्यों की पारदर्शिता पर एक साथ सवाल खड़े कर दिए हैं।