आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में जांच समिति के खिलाफ फूटा कर्मचारियों का गुस्सा, कुलाधिपति के अनुमोदन के बिना जांच और अभद्र व्यवहार का आरोप

आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में जांच समिति के खिलाफ फूटा कर
AKU में जांच समिति के खिलाफ फूटा कर्मचारियों का गुस्सा- फोटो : रोहित

Patna : आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय (AKU), पटना में जांच समिति की प्रक्रिया और समन्वयक पवन कुमार सिन्हा के कथित अमर्यादित व्यवहार को लेकर कर्मचारियों का आक्रोश सोमवार को सड़क पर आ गया। आक्रोशित कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय परिसर में जोरदार प्रदर्शन करते हुए पवन कुमार सिन्हा का पुतला दहन किया और उनके खिलाफ "इस्तीफा दो" के जोरदार नारे लगाए। कर्मचारियों का आरोप है कि बिना कुलाधिपति महोदय के अनुमोदन के गठित इस जांच समिति की वैधता स्वयं सवालों के घेरे में है और जांच के नाम पर तानाशाही रवैया अपनाया जा रहा है।


15 दिन की तय समय-सीमा खत्म होने के बाद जांच पर उठाए सवाल 

कर्मचारियों ने राज्यपाल सचिवालय द्वारा 27 जुलाई 2026 को जारी पत्र का हवाला देते हुए जांच समिति के अधिकार क्षेत्र पर गंभीर सवाल खड़े किए। पत्र के अनुसार समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी जांच पूरी करनी थी, लेकिन निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बावजूद 12 सितंबर 2026 को समिति परिसर में जांच के लिए पहुंच गई। कर्मचारियों का कहना है कि जांच अवधि बढ़ाने से संबंधित कोई आधिकारिक पत्र विश्वविद्यालय को प्राप्त नहीं हुआ था, ऐसे में बिना किसी अनुमति के जांच के नाम पर मनमानी स्वीकार नहीं की जाएगी।


कुलपति व अधिकारियों के साथ अभद्रता और धमकी का आरोप 

विश्वविद्यालय प्रशासन का आरोप है कि 12 सितंबर को निरीक्षण के दौरान समिति के समन्वयक पवन कुमार सिन्हा ने कुलपति एवं अन्य उच्च अधिकारियों के साथ कथित तौर पर उग्र, अमर्यादित और धमकी भरे लहजे में बातचीत की। आरोप है कि उन्होंने प्रशासनिक पदों की गरिमा को ठेस पहुंचाते हुए अत्यंत आपत्तिजनक और हिंसक शब्दों का प्रयोग किया। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि कोई भी जांच अधिकारी उच्च पदस्थ सरकारी सेवक होने के नाते प्रशासनिक शिष्टाचार से ऊपर नहीं हो सकता, और इस तरह के आचरण को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


1,344 पन्नों के साक्ष्य के बाद भी अतिरिक्त फाइलों की मांग 

प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि जांच के तय विषयों से अलग हटकर विभिन्न महत्वपूर्ण फाइलों और दस्तावेजों की मांग कर अधिकारियों पर गैर-वाजिब दबाव बनाया गया। विश्वविद्यालय द्वारा जांच से जुड़े 1,344 पृष्ठों के अनुलग्नक उपलब्ध कराए जाने के बावजूद अन्य संवेदनशील फाइलों की मांग किया जाना जांच की पारदर्शिता और नीयत पर सवाल उठाता है। कर्मचारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता और प्रशासनिक गरिमा के साथ किसी भी सूरत में समझौता नहीं किया जाएगा।


राज्यपाल से हस्तक्षेप और उच्चस्तरीय समीक्षा की मांग 

आंदोलनरत कर्मचारियों ने उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव व समन्वयक पवन कुमार सिन्हा से नैतिक आधार पर तत्काल पद से इस्तीफा देने की मांग की है। इसके साथ ही कर्मचारियों ने बिहार के कुलाधिपति-सह-राज्यपाल से पूरे मामले का तुरंत संज्ञान लेने, जांच समिति के गठन की वैधानिकता की समीक्षा कराने और दुर्व्यवहार के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे चरणबद्ध तरीके से आंदोलन को और अधिक उग्र रूप देंगे।

रोहित की रिपोर्ट