Bharat Tiwari Encounter: झुकी सरकार या बढ़ा दबाव? भरत तिवारी केस में SDPO और थानाध्यक्ष के खिलाफ FIR, पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू

Bharat Tiwari Encounter: भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब एक नया और बेहद संवेदनशील मोड़ ले लिया है।...

Family Cleared FIR Filed Against Cops in Bharat Tiwari Encou
भरत तिवारी केस में झुकी सरकार या बढ़ा दबाव?- फोटो : social Media

Bharat Tiwari Encounter: भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब एक नया और बेहद संवेदनशील मोड़ ले लिया है। जिस घटना को पुलिस शुरू में एक वैध मुठभेड़ बता रही थी, उसी मामले में अब पुलिस अधिकारियों के खिलाफ ही प्राथमिकी दर्ज होने से पूरे प्रकरण पर सवालों का साया और गहरा हो गया है। मामला अब केवल एक कथित एनकाउंटर तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि यह इंसाफ़, जवाबदेही और सत्ता-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बहस का केंद्र बन चुका है।

ताज़ा घटनाक्रम में शाहपुर थाने में जगदीशपुर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ), शाहपुर थानाध्यक्ष और एनकाउंटर में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। परिजनों की शिकायत और लगातार उठ रहे सवालों के बाद दर्ज इस मुकदमे ने जांच को नई दिशा दे दी है। अब यह देखना अहम होगा कि जांच एजेंसियां इस मामले में क्या निष्कर्ष निकालती हैं।

उधर, भरत तिवारी के परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि यह कोई वास्तविक मुठभेड़ नहीं बल्कि एक फर्जी एनकाउंटर था। उनका दावा है कि वायरल वीडियो में भरत को हथियार डालते हुए देखा गया था, जिसके बाद पुलिस कार्रवाई को लेकर संदेह और बढ़ गया। इसी मुद्दे को लेकर भारी विरोध-प्रदर्शन, जनआक्रोश और राजनीतिक दबाव भी देखने को मिला।

हालांकि परिवार का ग़म और गुस्सा अब भी कम नहीं हुआ है। परिजनों ने सरकार द्वारा घोषित न्यायिक जांच पर भी अविश्वास जताया है। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो पूरा परिवार सामूहिक आत्मदाह जैसा कठोर कदम उठाने को मजबूर होगा।

इस बीच भरत तिवारी का सोशल मीडिया रिकॉर्ड भी चर्चा में है। फेसबुक लाइव के माध्यम से वह अक्सर प्रशासन और व्यवस्था के खिलाफ अपनी राय रखता था। अब यह मामला अदालत, जांच एजेंसियों और सियासी गलियारों तक पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल होने और विभिन्न राजनीतिक दलों के समर्थन में आने के बाद यह प्रकरण बिहार की सबसे चर्चित कानूनी और राजनीतिक लड़ाइयों में शामिल हो गया है। पूरे प्रदेश की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि भरत तिवारी मौत मामले में आखिर सच क्या है और इंसाफ़ किसे मिलता है।