जिला भविष्य निधि पदाधिकारी को भ्रष्टाचार मामले में कोर्ट ने सुनाई सजा, इतने वर्षों की हुई जेल
अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत 3 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(डी) के तहत भी 5 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड का आदेश दिया गया।
Bihar News : सीतामढ़ी के तत्कालीन जिला भविष्य निधि पदाधिकारी प्रदीप कुमार को भ्रष्टाचार के एक मामले में विशेष निगरानी न्यायालय, मुजफ्फरपुर ने दोषी करार देते हुए 3 एवं 5 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला न्यायाधीश दशरथ मिश्र ने 5 अगस्त 2026 को सुनाया।
मामला वर्ष 2014 का है। निगरानी थाना कांड संख्या-97/2014 (विशेष वाद संख्या-77/2014) में प्रदीप कुमार पर परिवादी खुबीलाल कुमार से भविष्य निधि (पीएफ) से संबंधित कार्य पूरा करने और भुगतान योग्य कमीशन चालू कराने के एवज में 20 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप था। शिकायत के सत्यापन के बाद 9 दिसंबर 2014 को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने उन्हें 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।
मामले की जांच तत्कालीन अनुसंधानकर्ता मुशरी प्रसाद, पुलिस निरीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, मुजफ्फरपुर ने की और समय पर आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 12 गवाहों की गवाही कराई गई। विशेष लोक अभियोजक कृष्ण देव शाह ने प्रभावी पैरवी करते हुए अभियोजन का पक्ष रखा, जिसके आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी माना।
अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत 3 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(डी) के तहत भी 5 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड का आदेश दिया गया। जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक भ्रष्टाचार के कुल 13 मामलों में न्यायालय द्वारा दोषियों को सजा सुनाई जा चुकी है। ब्यूरो ने कहा है कि भ्रष्टाचार के मामलों में कानूनी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।