Bihar Land News: दादा-परदादा की जमीन के नहीं हैं कागज? अब सरकार खुद बनाकर देगी आपके घर की रजिस्ट्री, जानिए पूरा प्रोसेस
Bihar Land News: पुश्तैनी जमीन के मालिकाना हक को लेकर अक्सर विवाद और असमंजस की स्थिति बनी रहती है। कई परिवारों के पास जमीन के वैध कागजात नहीं होते, जिससे बैंक लोन लेने, मुआवजा पाने या संपत्ति बेचने में दिक्कतें आती हैं।
Bihar Land News: गांवों में आज भी करोड़ों लोग अपनी पुश्तैनी जमीन और मकानों पर काबिज तो हैं, लेकिन उनके पास मालिकाना हक का कोई पुख्ता कानूनी दस्तावेज नहीं है। इसी कमी के कारण अक्सर विवाद होते हैं और बैंकों से लोन मिलने में भी दिक्कत आती है। लेकिन अब केंद्र सरकार की 'स्वामित्व योजना' के तहत ड्रोन कैमरों के जरिए गांव-गांव की जमीन का नक्शा तैयार किया जा रहा है और लोगों को उनका 'प्रॉपर्टी कार्ड' सौंपा जा रहा है। अगर आपके पास भी कागज नहीं हैं, तो यह योजना आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
क्या है स्वामित्व योजना?
यह योजना ड्रोन तकनीक के जरिए गांवों की आबादी वाली जमीन का सर्वे कर मालिकों को ‘प्रॉपर्टी कार्ड’ या ‘टाइटल डीड’ जारी करती है, जिससे उन्हें कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त दस्तावेज मिल सके। ‘स्वामित्व’ का पूरा नाम ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी का सर्वेक्षण और उन्नत तकनीक का उपयोग करके मानचित्रण है। यह पंचायती राज मंत्रालय के तहत एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसे 24 अप्रैल 2021 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर देशभर में लॉन्च किया गया था।
योजना का उद्देश्य
योजना का उद्देश्य गांवों की आबादी वाली जमीन का ड्रोन सर्वे, संपत्ति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना, स्पष्ट मालिकाना हक स्थापित करना और संपत्ति विवादों को कम करना है। सर्वे ऑफ इंडिया के सहयोग से ड्रोन मैपिंग कर जमीन के पार्सल्स को डिजिटाइज किया जाता है। अब तक करीब 10.99 करोड़ पार्सल्स डिजिटाइज किए जा चुके हैं और 3.25 लाख से अधिक गांवों में ड्रोन सर्वे पूरा हो चुका है।
योजना के प्रमुख लाभ
1. कानूनी सुरक्षा- प्रॉपर्टी कार्ड मिलने से संपत्ति पर स्पष्ट मालिकाना हक स्थापित होता है और विवाद की संभावना घटती है।
2. बैंक लोन की सुविधा- प्रॉपर्टी कार्ड के आधार पर ग्रामीण अब आसानी से बैंक से लोन ले सकते हैं।
3. महिला सशक्तीकरण- कई राज्यों में बड़ी संख्या में संपत्तियों में महिलाओं को सह-मालिक के रूप में शामिल किया गया है।
4. डिजिटल रिकॉर्ड- संपत्ति का पूरा विवरण डिजिटल रूप में उपलब्ध रहता है, जिससे पारदर्शिता बढ़ती है।
कौन ले सकता है लाभ?
यह योजना उन ग्रामीण परिवारों के लिए है जो गांव की आबादी क्षेत्र में रहते हैं। जिनके पास पुश्तैनी जमीन के कागजात नहीं हैं। जो संपत्ति के दावेदार हैं। अगर आपका गांव योजना के तहत चुना गया है, तो आप पात्र हैं। योजना सभी राज्यों में लागू है और इसे राज्य राजस्व विभाग व पंचायती राज विभाग के माध्यम से लागू किया जाता है।
प्रॉपर्टी कार्ड कैसे बनवाएं?
1. गांव का चयन और ड्रोन सर्वे- चयनित गांव में ड्रोन से जमीन की मैपिंग की जाती है।
2. डिजिटाइजेशन- सर्वे के बाद जमीन का नक्शा डिजिटल रूप में तैयार किया जाता है।
3. सत्यापन- गांव के पंचायत या राजस्व कार्यालय में जाकर अपनी जमीन का विवरण सत्यापित करें।
4. आवेदन- आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्र के साथ आवेदन करें। पुराने कागज न होने पर भी सर्वे डेटा के आधार पर दावा स्वीकार किया जा सकता है।
5. कार्ड वितरण- सत्यापन के बाद प्रॉपर्टी कार्ड जारी किया जाता है। इसे ई-डिस्ट्रीब्यूशन या विशेष कार्यक्रमों के जरिए दिया जाता है।
6. ऑनलाइन ट्रैकिंग- योजना की आधिकारिक वेबसाइट svamitva.nic.in या ग्राम मानचित्र ऐप के जरिए स्टेटस ट्रैक किया जा सकता है।
किन दस्तावेजों की जरूरत?
आधार कार्ड, वोटर आईडी या अन्य पहचान पत्र, संपत्ति से जुड़े दावे की जानकारी। इस योजना की खास बात यह है कि पुराने दस्तावेज न होने पर भी ड्रोन सर्वे के आधार पर नया ‘रिकॉर्ड ऑफ राइट्स’ तैयार किया जाता है। ग्रामीण इलाकों में जमीन से जुड़े विवाद और कागजी समस्याओं के समाधान के लिए पीएम स्वामित्व योजना एक महत्वपूर्ण पहल है। यह न सिर्फ मालिकाना हक को कानूनी सुरक्षा देती है, बल्कि आर्थिक सशक्तीकरण और डिजिटल पारदर्शिता भी सुनिश्चित करती है।