Khan Sir: आर्म्स वेरिफिकेशन रिपोर्ट ने बढ़ाई खान सर की मुश्किलें, जांच में चौंकाने वाला खुलासा,एक बॉडीगार्ड बिना परमिट, दूसरे के पास सिर्फ सेल्फ डिफेंस लाइसेंस
Khan Sir: चर्चित फायरिंग मामले में पटना पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे केस की तहकीकात से नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं। हथियारों के वेरिफिकेशन के दौरान पुलिस को ऐसे कई सुराग मिले हैं, जिन्होंने जांच की दिशा बदल दी है। ...
Khan Sir: चर्चित फायरिंग मामले में पटना पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे केस की तहकीकात से नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं। हथियारों के वेरिफिकेशन के दौरान पुलिस को ऐसे कई सुराग मिले हैं, जिन्होंने जांच की दिशा बदल दी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, फायरिंग में इस्तेमाल किए गए दोनों हथियारों और उनके लाइसेंस से जुड़े कई अहम बिंदुओं को अब अपडेटेड केस डायरी का हिस्सा बनाया गया है।
जांच के मुताबिक, जिस हथियार से फायरिंग हुई, वह उत्तर प्रदेश के कासगंज निवासी तालेबर सिंह के नाम पर लाइसेंसी है। हालांकि पुलिस का दावा है कि उस हथियार का लाइसेंस पूरे भारत में मान्य नहीं था। आरोप है कि बिहार में हथियार लेकर सुरक्षा ड्यूटी करने के लिए आवश्यक वैध अनुमति भी नहीं ली गई थी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि स्थानीय प्रशासन, आर्म्स मजिस्ट्रेट अथवा संबंधित थाने को इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई, जबकि नियमों के तहत ऐसा करना जरूरी माना जाता है।
जांच एजेंसी के अनुसार, केवल बॉडीगार्ड ही नहीं बल्कि उसे नियुक्त करने वाले पक्ष की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिस का कहना है कि तालेबर सिंह का स्थानीय पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराया गया। यदि जांच में यह साबित होता है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी किए बिना हथियारबंद सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए, तो यह मामला और गंभीर हो सकता है।
दूसरे बॉडीगार्ड प्रदीप कुमार के हथियार की जांच में भी पुलिस को नए तथ्य मिले हैं। पुलिस के अनुसार, उसके पास ऑल इंडिया परमिट वाला लाइसेंस है, लेकिन वह कथित रूप से उसके पिता की हत्या के बाद आत्मरक्षा के उद्देश्य से जारी किया गया था। जांच एजेंसी यह पड़ताल कर रही है कि क्या उस लाइसेंस का इस्तेमाल निजी सुरक्षा ड्यूटी के लिए नियमों के अनुरूप था या नहीं।
इन सभी बिंदुओं को पुलिस ने अपनी अपडेटेड केस डायरी में शामिल किया है। अब इस मामले में 30 जून को पटना सिविल कोर्ट में सुनवाई होनी है, जबकि 13 जुलाई को एफआईआर रद्द करने की याचिका पर पटना हाईकोर्ट में सुनवाई निर्धारित है। अभियोजन पक्ष लगातार आरोपियों की जमानत का विरोध कर रहा है और अदालत के समक्ष अपने तर्क रख रहा है।
उधर, इस पूरे घटनाक्रम के बीच सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। बोरिंग रोड स्थित एक कोचिंग संस्थान की बहुमंजिला इमारत में बड़ी संख्या में छात्र पढ़ते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन तक पहुंचने का रास्ता संकरा है और किसी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में यह मामला अब केवल फायरिंग की जांच तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि हथियारों की वैधता, सुरक्षा मानकों और कानूनी जवाबदेही की भी बड़ी तफ्तीश बन गया है।फिलहाल जांच जारी है। अंतिम निष्कर्ष अदालत और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।