SIR विवाद पर पीएम मोदी के पूर्व मंत्री का CEC पर हमला, बिहार भाजपा के नेता रहे आरके सिंह ने खोली पोल

पूर्व नौकरशाह ने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में कथित बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि फॉर्म में एक अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई, जिसे उन्होंने नियमों के विपरीत बताया।

R K Singh on SIR
R K Singh on SIR- फोटो : news4nation

SIR :  चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर जारी विवाद अब और गहराता दिख रहा है। भाजपा नेता रहे बिहार के आरा के पूर्व सांसद, पूर्व केंद्रीय गृह सचिव और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और आयोग के कामकाज को लेकर बेहद गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने एक खुले पत्र में SIR के देशव्यापी आदेश को कथित तौर पर कानून के खिलाफ बताया और विपक्षी दलों से चुनाव बहिष्कार जैसे कदम पर विचार करने की अपील की है।


आरके सिंह ने अपने पत्र में Representation of the People Act, 1950 की धारा 21 का हवाला देते हुए कहा कि मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण विशेष परिस्थितियों में ही किया जा सकता है। उनके मुताबिक, इसके लिए कारण लिखित रूप से दर्ज किए जाने चाहिए और प्रक्रिया किसी विशेष निर्वाचन क्षेत्र या उसके हिस्से तक सीमित होनी चाहिए। सिंह ने सवाल उठाया कि पूरे देश में SIR लागू करने का आधार क्या था।


Form 6 में बदलाव पर भी सवाल

पूर्व नौकरशाह ने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में कथित बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि फॉर्म में एक अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई, जिसे उन्होंने नियमों के विपरीत बताया। यह मुद्दा हाल में चुनाव आयोग के भीतर सामने आए मतभेदों से भी जुड़ा है। The Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने Form 6 में बदलाव सहित SIR से जुड़े कई मामलों पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। सिंह ने पूछा कि जब आयोग के भीतर इस बदलाव को लेकर बहुमत की सहमति नहीं थी तो इसे लागू करने का निर्णय किसके निर्देश पर लिया गया।


बंगाल में 16 लाख मतदाताओं का मुद्दा

आरके सिंह ने पश्चिम बंगाल में करीब 16.10 लाख मतदाताओं के नाम से जुड़े अपील मामले पर भी सवाल उठाया। रिपोर्टों के मुताबिक, ये वे मतदाता थे जिनके नाम चुनाव अधिकारियों ने सूची में बनाए रखने का फैसला किया था, लेकिन उनके खिलाफ अपील दायर की गई। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने कथित तौर पर यह सवाल उठाया था कि इन अपीलों को दाखिल करने के लिए आयोग की ओर से किसे अधिकृत किया गया था।


महाभियोग नहीं आपराधिक केस हो

सिंह ने विपक्ष की ओर से CEC के खिलाफ महाभियोग की मांग को भी राजनीतिक संख्या बल के कारण प्रभावहीन बताया। उन्होंने इसके बजाय ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज कराने की बात कही। साथ ही उन्होंने मांग की कि जिन राज्यों में मतदाताओं से जुड़ी अपीलें लंबित थीं, वहां हुए चुनावों की वैधता पर पुनर्विचार किया जाए।  उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की भी वकालत की। सुप्रीम कोर्ट के SIR संबंधी रुख पर भी सिंह ने कड़ी टिप्पणी की।


हालांकि, चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े अपने आदेशों और Form 6 में बदलाव को लेकर कहा है कि आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने आंतरिक मतभेदों को निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। आरके सिंह नवंबर 2025 में बीजेपी से अलग हुए थे। इससे पहले वह 2017 से 2024 तक केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री रहे थे।