बिहार विधानसभा के स्थापना दिवस पर संयुक्त सदन में बोले राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, कहा-बिहार में भविष्य गढ़ने की ताकत
Bihar Vidhan Sabha Foundation Day: राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि “बिहार में भविष्य गढ़ने की ताक़त है।” उन्होंने कहा कि तकनीक के सहारे विधानसभा अब विधायकों को और ज़्यादा सशक्त और जवाबदेह बनाएगी।...
Bihar Vidhan Sabha Foundation Day:बिहार की सियासत और संसदीय परंपराओं के लिए आज का दिन एक आकिहारसिक मुक़ाम बन गया, जब बिहार विधानसभा के स्थापना दिवस पर संयुक्त सदन की कार्यवाही की औपचारिक शुरुआत हुई। लोकतंत्र के इस पावन पर्व पर विधानसभा का सेंट्रल हॉल सियासी रौनक, संवैधानिक गरिमा और तकनीकी बदलाव का गवाह बना।
कार्यक्रम का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार और अन्य विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने सेंट्रल हॉल में मौजूद सभी अतिथियों का अंगवस्त्र, स्मारिका और पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया। इसी मंच से ओम बिड़ला ने डिजिटल बिहार विधानसभा का उद्घाटन करते हुए ‘ई-विधान एप’ को लॉन्च किया, जिसके साथ ही बिहार विधानसभा पूरी तरह डिजिटल युग में दाख़िल हो गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि “बिहार में भविष्य गढ़ने की ताक़त है।” उन्होंने कहा कि तकनीक के सहारे विधानसभा अब विधायकों को और ज़्यादा सशक्त और जवाबदेह बनाएगी। ई-विधान से जनता अपने जनप्रतिनिधियों के कामकाज का आकलन आसानी से कर सकेगी। हरिवंश ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि बिहार ने नए सियासी और प्रशासनिक आकार में खुद को ढाला है और अपने गौरवशाली अतीत के साथ नवीनतम तकनीक को अपनाया है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि मूल्यों की विरासत को संभालना हमारी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है।
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अपने संबोधन में बिहार की सांस्कृतिक और संवैधानिक पहचान की चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय संविधान में सनातन और अन्य धर्मों के देवी-देवताओं के चित्र बिहार की विरासत से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि बिहार के उस ऐतिहासिक गौरव को फिर से स्थापित करना हम सबका साझा संकल्प होना चाहिए। ई-विधान के उद्घाटन के लिए उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला का आभार जताया।
वहीं, विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि आज का दिन विधायिका को और अधिक मज़बूत, प्रभावी और पारदर्शी बनाने का संकल्प लेने का है। कुल मिलाकर, स्थापना दिवस का यह समारोह सिर्फ़ उत्सव नहीं, बल्कि बिहार की सियासत में डिजिटल लोकतंत्र की नई इबारत लिखने का एलान बन गया।