Bihar Police:IPS सुनील नायक की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, आंध्रप्रदेश पुलिस ने किया था रेड, हत्या और प्रताड़ना का है गंभीर आरोप

आंध्र प्रदेश पुलिस की टीम सुबह करीब 6 बजे आईपीएस अधिकारी सुनील नायक को गिरफ्तार करने पहुंची थी। सूत्रों के मुताबिक पुलिस उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर लेकर आंध्र प्रदेश ले जाने की तैयारी में थी, जहां पहले से दर्ज मामले में पूछताछ की योजना थी।

High Court stays arrest of IPS Sunil Nayak
IPS सुनील नायक की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक- फोटो : reporter

Bihar Police: ड्रामाई अंदाज़ में शुरू हुई कार्रवाई पर अदालत ने फौरन ब्रेक लगा दिया। आंध्र प्रदेश पुलिस की टीम सुबह करीब 6 बजे आईपीएस अधिकारी सुनील नायक को गिरफ्तार करने पहुंची थी। सूत्रों के मुताबिक पुलिस उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर लेकर आंध्र प्रदेश ले जाने की तैयारी में थी, जहां पहले से दर्ज मामले में पूछताछ की योजना थी।

लेकिन ऐन मौके पर कानूनी बाज़ी पलट गई। सुनील नायक की ओर से दाखिल अर्जी पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए उनकी गिरफ्तारी पर स्टे ऑर्डर जारी कर दिया। कोर्ट के इस आदेश के बाद पुलिस टीम को कदम पीछे खींचने पड़े।

बताया जा रहा है कि मामला वर्ष 2021 के कथित हिरासत प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें आंध्र प्रदेश पुलिस पहले से जांच कर रही है। हालिया एफआईआर और पूछताछ के नोटिस के बाद कार्रवाई तेज हुई थी। सुबह-सुबह की यह ‘रेड’ प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई।

कानूनी जानकारों का कहना है कि स्टे का मतलब यह नहीं कि मामला खत्म हो गया, बल्कि फिलहाल गिरफ्तारी पर रोक है। आगे की सुनवाई में कोर्ट तय करेगा कि जांच एजेंसियों को किस दायरे में कार्रवाई की इजाज़त होगी।

बता दे आंध्र की सियासत में हलचल तेज़ है। मौजूदा विधानसभा डिप्टी स्पीकर के. रघुराम कृष्ण राजू से जुड़े कथित हत्या प्रयास और हिरासत प्रताड़ना केस में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी सुनील नायक के ठिकाने पर रेड की ।  वर्ष 2025 के मार्च में प्रकाशम ज़िले के एसपी और जांच अधिकारी ए.आर. दामोदर ने नायक को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया था। उस वक्त सुनील नायक आंध्र में प्रतिनियुक्ति पर सीआईडी में डीआईजी के पद पर तैनात थे।  बता दें पिछले साल 2 या 3 मार्च 2025 को IPS सुनील नायक को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया गया था।

मामला साल 2021 का है, जब तत्कालीन सांसद रघुराम कृष्ण राजू को वाईएसआर कांग्रेस पार्टी सरकार के दौर में गिरफ्तार किया गया था। राजू का आरोप है कि हिरासत में उनके साथ बेरहमी हुई, जानलेवा हमला किया गया और उनकी बाईपास सर्जरी की जानकारी होने के बावजूद सीने पर दबाव डाला गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि जरूरी दवाएं लेने से रोका गयाजिसे वह सियासी साज़िश करार देते हैं।

जुलाई 2024 में दर्ज एफआईआर में पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी, तत्कालीन सीआईडी प्रमुख पी.वी. सुनील कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल किए गए। शिकायत में रबर बेल्ट और लाठियों के इस्तेमाल का आरोप भी दर्ज है। बताया जाता है कि गिरफ्तारी के दौरान हैदराबाद से गुंटूर लाने की प्रक्रिया में सुनील नायक की मौजूदगी की भी जांच हो रही है।

नायक 2019 में प्रतिनियुक्ति पर आंध्र गए थे और 2023 में अपने मूल कैडर बिहार लौट आए, जहां वे इस समय डीआईजी (अग्निशमन सेवा) के पद पर तैनात हैं। हालिया कार्रवाई में एक अन्य नेता के. तुलसी बाबू की गिरफ्तारी और हाईकोर्ट द्वारा जमानत खारिज होने से जांच का दायरा और सख़्त होता दिख रहा है।

कानूनी मोर्चे पर अब पूछताछ, मेडिकल रिकॉर्ड, हिरासत की वीडियोग्राफी और कॉल डिटेल्स जैसे सबूतों की कड़ी जांच हो रही है। सियासी गलियारों में इसे बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है क्या रेड से ‘कस्टडी कांड’ की गुत्थी सुलझेगी, या सियासत का पारा और चढ़ेगा? जांच एजेंसियों की अगली चाल पर सबकी नज़रें टिकी हैं।

रिपोर्ट- कुलदीप भारद्वाज