Bihar News: सुरक्षा और विकास की खातिर इतिहास का घटेगा कद, बदलेगा 1917 का इतिहास, पटना सचिवालय के टावर पर इस कारण चलेगा हथौड़ा!

Bihar News: ऐतिहासिक पुराना सचिवालय भवन के टावर की ऊंचाई घटाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है।...

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सुरक्षा और विकास की खातिर इतिहास का घटेगा कद- फोटो : social Media

Bihar News: बिहार की सियासत और विकास की बहस के बीच एक अहम मसला सुर्खियों में है। जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर बड़े विमानों की सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करने के लिए ऐतिहासिक पुराना सचिवालय भवन के टावर की ऊंचाई घटाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है।

मामला महज़ इमारत की ऊंचाई का नहीं, बल्कि हवाई सुरक्षा और राजधानी के बुनियादी ढांचे से जुड़ा हुआ है। वर्तमान में सचिवालय टावर की कुल ऊंचाई 49.5 मीटर है, जो एयरपोर्ट के सुरक्षा मानकों से अधिक मानी जा रही है। यही वजह है कि रनवे की 134 मीटर लंबाई का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। बड़े विमानों को तीन डिग्री के सुरक्षित एंगल के बजाय अधिक एंगल पर उतरना पड़ता है, जिससे रिस्क फैक्टर बढ़ जाता है।

प्रस्ताव के मुताबिक टावर की ऊंचाई 17.5 मीटर कम की जाएगी। इससे रनवे का बेहतर उपयोग संभव होगा और बड़े एयरक्राफ्ट की लैंडिंग और टेकऑफ अधिक सुरक्षित हो सकेगी। जिला प्रशासन और एयरपोर्ट अथॉरिटी ने संयुक्त रूप से केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय को पत्र भेजकर इस पहल की सिफारिश की है। अब राज्य सरकार की अंतिम मंजूरी का इंतजार है।

सियासी गलियारों में इस मुद्दे को लेकर बहस तेज है। एक ओर सुरक्षा और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की दलील दी जा रही है, तो दूसरी ओर 1917 में निर्मित ऐतिहासिक धरोहर के स्वरूप में बदलाव को लेकर सांस्कृतिक सरोकार भी उठ रहे हैं। सवाल यह है कि विकास और विरासत के बीच संतुलन कैसे कायम किया जाएगा?

अगर प्रस्ताव को हरी झंडी मिलती है, तो पटना एयरपोर्ट पर बड़े विमानों की आवाजाही का रास्ता साफ होगा। इससे राजधानी की कनेक्टिविटी, निवेश और व्यापारिक गतिविधियों को भी नई रफ्तार मिल सकती है।

अब निगाहें केंद्र और राज्य सरकार के फैसले पर टिकी हैं क्या सुरक्षा और विकास की खातिर इतिहास का कद घटेगा, या कोई बीच का रास्ता निकलेगा? फैसला जो भी हो, पटना की सियासत में यह मुद्दा आने वाले दिनों में गरमाने वाला है।