IGIMS में सिस्टम का सर्जिकल स्ट्राइक, 48 घंटे के बवाल के बाद झुका प्रशासन, उप प्राचार्या हटाई गईं

IGIMS : छात्राओं के भारी विरोध, नारेबाजी और आरोपों के बाद स्वास्थ्य विभाग और संस्थान प्रशासन को आखिरकार झुकना पड़ा।

IGIMS Row Admin Bows After 48 Hr Protest Deputy Principal Re
छात्राओं के आंदोलन के आगे झुका प्रशासन- फोटो : reporter

IGIMS: पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान यानी IGIMS नर्सिंग कॉलेज में पिछले 48 घंटे से चल रहा छात्राओं का उग्र आंदोलन आखिरकार शुक्रवार को खत्म हो गया। लेकिन इस आंदोलन ने संस्थान की व्यवस्था और प्रशासनिक रवैये पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्राओं के भारी विरोध, नारेबाजी और आरोपों के बाद स्वास्थ्य विभाग और संस्थान प्रशासन को आखिरकार झुकना पड़ा।

मामले की गंभीरता को देखते हुए नर्सिंग कॉलेज की उप प्राचार्या रूपाश्री दासगुप्ता को 2021 से 2025 बैच तक के सभी अकादमिक कार्यों से तत्काल प्रभाव से अलग कर दिया गया है। संस्थान प्रशासन ने साफ कर दिया है कि फिलहाल वे किसी भी शैक्षणिक गतिविधि का संचालन नहीं करेंगी। छात्राओं के आरोपों की जांच के लिए विशेष कमेटी भी गठित कर दी गई है।

शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, संस्थान के निदेशक और छात्राओं के प्रतिनिधिमंडल के बीच करीब एक घंटे तक हाईवोल्टेज बैठक चली। इसके बाद छात्राओं ने अपना प्रदर्शन वापस लेने का फैसला किया और छात्रावास व कक्षाओं में लौट गईं। आंदोलन कर रही छात्राओं का आरोप था कि उन्हें लंबे समय से मानसिक प्रताड़ना, दुर्व्यवहार और धमकियों का सामना करना पड़ रहा था। उनका कहना था कि छोटी-छोटी बातों पर अपमानित किया जाता था और सेमेस्टर में फेल करने की धमकी देकर मानसिक दबाव बनाया जाता था।

कई छात्राओं ने दावा किया कि लगातार तनाव की वजह से उनकी मानसिक और शारीरिक स्थिति प्रभावित हो रही थी। आंदोलन के दौरान छात्राओं ने कॉलेज है या टॉर्चर रूम जैसे सवाल उठाकर प्रशासन पर गंभीर हमला बोला।

इस पूरे विवाद में वर्ष 2018 से लंबित स्टाइपेंड का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठा। छात्राओं ने कहा कि महीनों नहीं, बल्कि वर्षों से स्टाइपेंड अटका हुआ है, जिससे आर्थिक परेशानियां बढ़ती जा रही हैं और पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने भरोसा दिया है कि अगले सात कार्य दिवसों के भीतर स्टाइपेंड बहाल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

संस्थान प्रशासन ने यह भी स्वीकार किया कि शैक्षणिक सत्र करीब छह महीने पीछे चल रहा है। अब पढ़ाई और परीक्षाओं को समय पर कराने के लिए नई कार्ययोजना तैयार की जा रही है। साथ ही छात्राओं की शिकायतों और समस्याओं के समाधान के लिए छात्र-प्रशासन समन्वय कमेटी बनाने का फैसला लिया गया है, जिसमें हर सेमेस्टर से दो-दो छात्राओं को शामिल किया जाएगा।