Bihar News: मौत को मात देकर अमरीकी मरुस्थल में गड़ गया तिरंगा, बिहार के फौजी शैलेश कुमार ने बेडवाटर 135 जीतकर रचा इतिहास, सूबे में जश्न का माहौल

Bihar News: बिहार की माटी ने एक बार फिर देश का मस्तक गर्व से ऊंचा कर दिया है। बक्सर और बिहार का नाम रौशन करने वाले भारतीय नौसेना के जांबाज फौजी शैलेश ने अमरीका की बेहद खौफनाक और दुनिया की सबसे कठिन मानी जाने वाली डेथ वैली में इतिहास रच दिया है...

Indian Navy soldier wins world toughest Death Valley maratho
मौत के रेगिस्तान में बिहार के फौजी का अदम्य साहस- फोटो : social Media

Bihar News:  बिहार की माटी ने एक बार फिर देश का मस्तक गर्व से ऊंचा कर दिया है। बक्सर और बिहार का नाम रौशन करने वाले भारतीय नौसेना के जांबाज फौजी शैलेश कुमार ने अमरीका की बेहद खौफनाक और दुनिया की सबसे कठिन मानी जाने वाली डेथ वैली में इतिहास रच दिया है। उन्होंने मौत को मात देकर वह कर दिखाया है, जो आज तक कोई भी भारतीय नहीं कर सका था। शैलेश ने दुनिया की सबसे दुष्कर अल्ट्रामैराथनों में शुमार बेडवाटर 135 की दौड़ जीतकर न सिर्फ अपनी वीरता का परचम लहराया है, बल्कि देश और प्रदेश का मान भी बढ़ाया है।

जूतों के तलवे पिघला देने वाली वह खौफनाक दौड़

यह कोई आम मैराथन नहीं, बल्कि इंसान के धैर्य और शारीरिक क्षमता की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा है। यहाँ का तापमान तकरीबन 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जहाँ दौड़ने वाले धावकों के जूतों के तलवे तक पिघलने का खतरा मंडराता रहता है। अमरीका की इस डेथ वैली में डामर की सड़कें किसी सुलगते हुए अंगारे की तरह तपती हैं। इसके अलावा, वहां की शुष्क और गर्म हवाएं पल भर में शरीर का सारा पानी सुखा देती हैं, जिससे भारी डिहाइड्रेशन और बेहोशी का खतरा हर पल बना रहता है। ऐसी अकल्पनीय परिस्थितियों में शैलेश ने अपनी फौलादी जिजीविषा और अटूट हौसले के बल पर इस रेस को फतह किया।

साधारण फिटनेस से शुरू हुआ था असाधारण सफर

शैलेश कुमार की यह ऐतिहासिक उपलब्धि रातों-रात की मेहनत का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे वर्षों का कड़ा संघर्ष छिपा है। मूल रूप से बिहार के रहने वाले शैलेश वर्ष 2013 में भारतीय नौसेना में भर्ती हुए थे और वर्तमान में केरल के कोच्चि स्थित नेवल एयरक्राफ्ट यार्ड में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। नौसेना की अनुशासित जीवनशैली और शारीरिक प्रशिक्षण उनके जीवन का हिस्सा जरूर था, लेकिन उन्होंने वर्ष 2014 में अपनी फिटनेस को बेहतर बनाने के लिए महज शौक के तौर पर दौड़ना शुरू किया था।शुरुआत में उनका कोई बड़ा लक्ष्य नहीं था। उन्होंने धीरे-धीरे हाफ मैराथन और फिर फुल मैराथन दौड़ना शुरू किया। वर्ष 2018 में 101 किलोमीटर की अल्ट्रा रेस से शुरू हुआ यह सफर बढ़ते-बढ़ते 246 किलोमीटर की दूरी तक जा पहुंचा और अब 'बेडवाटर 135' की इस ऐतिहासिक जीत के साथ नई बुलंदियों को छू चुका है।

बिहार में  जश्न का माहौल

शैलेश कुमार की इस कामयाबी से पूरे देश और खासकर उनके गृह राज्य बिहार में जश्न का माहौल है। उनकी इस कामयाबी ने साबित कर दिया है कि अगर बुलंद हौसला और पक्का इरादा हो, तो दुनिया की कोई भी चट्टान या रेगिस्तान आपके कदमों को नहीं रोक सकता।