Bihar Crime: बिहार में राजनीति के मंच पर इंसाफ का निकल रहा जनाजा! जमुई की दरिंदगी पर सियासत की बेशर्मी से लोग हैरान

Bihar Crime: जमुई में नाबालिग छात्रा और उसके साथी के साथ बदसलूकी, मारपीट और छेड़छाड़ का वायरल वीडियो सामने आने के बाद बिहार की सियासत में संग्राम छिड़ गया है।...

Bihar Crime: बिहार में राजनीति के मंच पर इंसाफ का निकल रहा ज
दरिंदगी पर सियासत की बेशर्मी - फोटो : social Media

Bihar Crime: बिहार के गलियारों से आजकल एक अजीबोगरीब सुरक्षा का राग सुनाई देता है। सरकार का दावा है कि राज्य की बेटियां आधी रात को भी बेखौफ घूम सकती हैं, लेकिन विडंबना देखिए कि जब जमुई की सरजमीं पर एक बेटी की आबरू और इंसानियत का सरेआम कत्ल होता है, तो सत्ता के गलियारों से जो आवाजें आती हैं, वे किसी सदमे से कम नहीं होतीं। जमुई के उस दहला देने वाले वायरल वीडियो ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कागजी दावों के फलक पर सुशासन का मुखौटा कितना खोखला हो चुका है।

जब ऐसे मामलों पर मंत्रियों की जुबान फिसलती है, तो ऐसा लगता है कि संवेदनाओं का दीवाला निकल चुका है। कोई इसे छोटी-मोटी घटना कहकर टालने की बेशर्म कोशिश करता है, तो कोई पुराने दौर की कालिख का हवाला देकर अपनी नाकामी पर पर्दा डालने का नाकाम हुनर दिखाता है। अरे हुक्मरानों! जरा गिरेबान में झांककर देखिए, जब दरिंदे किसी बेटी को खुलेआम उठा ले जाते हैं, तो वह छिटपुट वारदात नहीं, बल्कि इस तथाकथित सभ्य समाज और कानून की चौखट पर इंसानियत की अर्थी उठ रही होती है।

राजनीति की फितरत भी बड़ी अजीब है। अपराध की इस काली रात पर भी सियासी रोटियां सेंकने का दौर बदस्तूर जारी है।उमेश कुशवाह संवेदनशीलता की ढ़ोल पीट रहे हैं । जब सत्ता पक्ष के नुमाइंदे जमुई कांड को 'छोटी-मोटी घटना' करार देते हैं, तो लगता है कि उनके लिए बेटियों की इज्जत कोई मायने नहीं रखती, बल्कि कुर्सी बचाना ही उनका इकलौता दीन-धर्म बन गया है।बिहार जेडीयू अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने जमुई की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि छिटपुट घटना अगर होती है पर हमारी सरकार संवेदनशील है..! उन्होंने कहा कि देखें 2005 से पहले का बिहार कैसा था. क्या उस समय कोई घर से बाहर जाता था? उस समय कैसे हालात थे. लोग अपनी जिंदगी किसी तरह काट रहे थे?सरकार के नुमाइंदे अक्सर 2005 से पहले के दौर की दुहाई देकर अपनी पीठ थपथपा लेते हैं। क्या आज के कुकर्मों का हिसाब कल के अंधेरे से चुकता किया जाएगा? जनता ने आपको इसलिए नहीं चुना था कि आप हर जुर्म पर अतीत का चस्का लगाकर पल्ला झाड़ लें।नेता प्रतिपक्ष से लेकर तमाम विपक्षी दल इस मुद्दे पर हुंकार तो भर रहे हैं, लेकिन क्या उनकी सियासत सिर्फ बयानों के तीर चलाने तक सीमित रह जाएगी?

जमुई की घटना ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था के चिथड़े उड़ा दिए हैं। पटना में नीट छात्रा की मौत का राज अभी दफन ही था कि भरत तिवारी एनकाउंटर और अब जमुई की इस बरबरता ने बिहार को पूरे देश में शर्मसार कर दिया है। 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' के नारे सिर्फ मंचों की शोभा बढ़ाने के लिए रह गए हैं, जबकि जमीन पर स्थिति यह है कि गुंडे और मनचले कानून को ठेंगा दिखाकर तांडव कर रहे हैं।

जब खाकी जुर्म को छोटा मामला कह कर टालने लगे,पर्दा डालने लगें, तो समझिए कि राज्य का इकबाल दम तोड़ चुका है। ममता बनर्जी ने बिल्कुल सही कहा कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि पूरे देश का सामूहिक फेल्योर है, जहाँ हम अपनी बेटियों की हिफाजत करने में नाकाम रहे। हालाकि वीडियो के वायरल होते हीं पुलिस एक्शन में आई और स्वत: संज्ञान लेकर मामले की जांच शुरु की, जो काबिले तारिफ है, लेकिन सियासत उनके तो रंग हीं अनेक है।

सवाल है कि क्या यह दौर जुमलों का है, जहाँ अपराध को सियासत के तराजू में तौला जाता है और पीड़ित की चीखों को अनसुना कर दिया जाता है। अगर वक्त रहते इस राजनीतिक  और प्रशासनिक हठधर्मिता पर लगाम नहीं लगाई गई, तो वह दिन दूर नहीं जब कानून की किताबें सिर्फ कचरे के ढेर में मिलेंगी और अपराधियों का राज चलेगा। अब वक्त आ गया है कि जनता इन खोखले आश्वासनों के फरेब से बाहर निकले। जेन जी है छात्रा और जेन जी हुक्मरानों से सीधा हिसाब मांग रही है।

हीरेश कुमार की रिपोर्ट