लालू ने रेल मंत्रालय के लिए रामविलास से की लड़ाई, बिहार में सत्ता गंवाई, शिवानंद तिवारी ने खोला नीतीश का राज

लालू यादव और नीतीश कुमार के पुराने मित्र और राजनीतिक सहयोगी शिवानंद तिवारी ने अपने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया है. इसमें उन्होंने लालू और रामविलास के बीच रेल मंत्रालय को लेकर हुई लड़ाई का राज खोला है.

Lalu Yadav Fought Ram Vilas Paswan
Lalu Yadav Fought Ram Vilas Paswan- फोटो : news4nation

Bihar News : बिहार की राजनीति के पुराने समाजवादी नेता शिवानंद तिवारी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव से जुड़े अपने पुराने राजनीतिक अनुभवों को याद करते हुए एक लंबी सोशल मीडिया पोस्ट लिखी है। इस पोस्ट में उन्होंने नीतीश कुमार के राजनीतिक सफर, उनके रेल मंत्री रहने के दौर और 2004 में लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्रालय संभालने से जुड़े किस्से का जिक्र किया है। तिवारी के मुताबिक, रेल मंत्रालय को लेकर लालू प्रसाद यादव और दिवंगत रामविलास पासवान के बीच पैदा हुई दूरी का असर आगे बिहार की राजनीति पर भी पड़ा।


शिवानंद तिवारी ने अपने पोस्ट में लिखा है - नीतीश कुमार का एक वीडियो देखा। वे कहीं से निकल रहे हैं और वीडियो में एक ऐसा दृश्य है, जिसमें वे अपनी पैंट के पास खुजली करते दिखाई दे रहे हैं। इसी दृश्य को लेकर बीटेक्स नाम के दाद और खुजली की दवा लगाने वाले आयुर्वेदिक मलहम ने अपना विज्ञापन बना दिया है. उस दृश्य को देखकर मुझे बहुत पीड़ा हुई।


नीतीश कुमार से मेरा संबंध बहुत पुराना है। उनसे हम लोगों को बहुत उम्मीदें थीं, खासकर उन लोगों को जो लोहियावादी राजनीति से निकले थे। नीतीश के संसद में भाषणों को देखिए, तो समझ में आएगा कि उस समय उनकी राजनीतिक सोच और उनकी भाषा में कितनी उम्मीद दिखाई देती थी।


नीतीश का ठाठ 

उन्होंने कहा,  बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में भी नीतीश कुमार ने कुछ अच्छे काम किए। अति पिछड़ों को आरक्षण देने की दिशा में काम हुआ, सरकारी नौकरियों में महिलाओं को आरक्षण मिला. जीविका दीदियों का बड़ा नेटवर्क बना और कई ऐसे काम हुए जिनका समाज पर असर पड़ा। लेकिन उनके सारे कामों से मैं सहमत हूँ, ऐसा भी नहीं है। 

वह दौर अलग था. मुझे वह समय भी याद है जब नीतीश कुमार रेलवे मंत्री थे। एक मर्तबा मैंने कहा कि तुम रेल मंत्री हो गये. लेकिन रेल मंत्री और मंत्रालय क्या है यह मुझे पता ही नहीं चला.  तुरंत कार्यक्रम बना. दिल्ली से हवाई जहाज़ से हम चेन्नई गए. और वहाँ से हम लोग रेल मंत्री की स्पेशल ट्रेन से कोंकण रेलवे के रास्ते गोवा तक गए. कोंकण रेलवे जॉर्ज साहब का सपना था. नीतीश कुमार ने उसे पूरा किया. ललन भी उस यात्रा में साथ था. रेल मंत्री का ठाट ही अलग था. बेडरूम, ड्राइंग रूम. हर ज़ोन स्टाफ़ में बदल जाता था. स्टाफ़ के साथ बावरची भी बदल जाते थे . मंत्री के लिए बेडरूम होता था. बेडरूम में तो दो पलंग रहता है. स्पेशल बाथरूम . बेडरूम का दूसरा पलंग मेरा होता था. सुबह उठने के बाद अपना बिछावन ठीक कर देना नीतीश की आदत है. पहले बाथरूम गए तो नहाने के बाद सबकुछ सहेज कर बाहर आते थे. 


लालू को सुनाई नीतीश की कहानी 

मैंने रेल मंत्री के ठाट की कहानी लालू यादव को सुनाई थी. उसके बाद रेल मंत्रालय उनके दिमाग़ में बैठ गया. अंततोगत्वा लालू जी ने रेल मंत्रालय ले ही लिया. लेकिन उन्हें इसकी बहुत बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ी. रामविलास जी भी रेल चहते थे. उसके पहले कुछ दिनों के लिए  वे रेल मंत्री रह चुके थे. लोकसभा चुनाव में लालू जी और रामविलास जी एक ही गठबंधन में थे. उसका परिणाम बहुत अच्छा हुआ था. रेल मंत्रालय के कारण रामविलास जी के साथ लालू जी का गठबंधन टूट गया. मैंने कोशिश की थी कि रेल मंत्रालय के लिए वह गठबंधन नहीं टूटे. उसका परिणाम हुआ कि लालू जी 2005 के चुनाव में अल्पमत में आ गये.

 

इतिहास में सब दर्ज होगा

आज स्थिति यह है कि लालू यादव भी चलने में डगमगाते हुए चलते हैं और उन्हें दो लोग सहारा देते हैं। नीतीश कुमार की हालत सब देख ही रहे हैं. मैं भी डंडा लेकर चलने लगा हूँ. हम लोगों का जीवन अंत की ओर बढ़ रहा है। मैं लालू और नीतीश दोनों से ऊम्र में बड़ा हूँ. इसलिए दोनों से पहले मैं ही दुनिया से निकलूँगा. लेकिन इतिहास में यह सब दर्ज होगा कि किसने किस तरह की भूमिका निभाई. चाहे नीतीश कुमार हों या लालू यादव।