बिहार में भूमि विवाद पर पुलिस की 'मनमानी' खत्म, थाने अब नहीं सुलझाएंगे जमीन का झगड़ा, पुलिस का काम सिर्फ शांति बनाना, दखल-कब्जा कराया तो नपेंगे थानेदार

बिहार में 1 फरवरी 2026 से भूमि विवाद के नए नियम लागू होंगे। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने स्पष्ट किया कि पुलिस अब जमीन पर कब्जा या निर्माण नहीं करा सकेगी। उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई।

बिहार में भूमि विवाद पर पुलिस की 'मनमानी' खत्म, थाने अब नहीं

Patna - बिहार के उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने राज्य की भूमि विवाद समाधान प्रक्रिया को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि अब पुलिस हस्तक्षेप की आड़ में किसी को डराने-धमकाने का खेल बंद होगा। डबल इंजन सरकार ने यह साफ कर दिया है कि भूमि विवाद न्यायिक और राजस्व प्रक्रिया का हिस्सा है, न कि पुलिस की व्यक्तिगत पसंद-नापसंद का। 

पुलिस की भूमिका केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित

उपमुख्यमंत्री ने 'भूमि सुधार जन कल्याण संवाद' में मिली शिकायतों का हवाला देते हुए कहा कि कई मामलों में पुलिस द्वारा अनावश्यक हस्तक्षेप किया गया, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, पुलिस का दायित्व केवल शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। पुलिस बिना किसी सक्षम कोर्ट या प्राधिकार के आदेश के न तो किसी को जमीन पर दखल-कब्जा दिला सकेगी और न ही कोई निर्माण कार्य या चहारदीवारी करा सकेगी। 

1 फरवरी से लागू होंगे सख्त नियम और नई कार्यप्रणाली

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने भूमि विवादों के निपटारे के लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी की है, जो 1 फरवरी 2026 से पूरे बिहार में प्रभावी होगी। अपर मुख्य सचिव अरविन्द कुमार चौधरी और प्रधान सचिव सी.के. अनिल द्वारा जारी निर्देशों के तहत अब थाना स्तर पर हर विवाद की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करना अनिवार्य होगा।

  • थाना डायरी में प्रविष्टि : किसी भी विवाद की सूचना पर स्टेशन डायरी में दोनों पक्षों का नाम, जमीन का खाता-खेसरा, रकबा और विवाद की प्रकृति दर्ज करनी होगी।

  • अंचलाधिकारी के साथ समन्वय : थाना प्रभारी को अनिवार्य रूप से अंचलाधिकारी (CO) को लिखित या डिजिटल सूचना देनी होगी ताकि राजस्व और पुलिस प्रशासन मिलकर काम कर सकें।

  • शनिवार की बैठक और डिजिटल निगरानी

भूमि विवादों के त्वरित समाधान के लिए प्रत्येक शनिवार को अंचल कार्यालय में सीओ और थाना प्रभारी की संयुक्त बैठक अनिवार्य कर दी गई है। इस बैठक में होने वाली प्रगति को विभागीय पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि धारा 107/116 जैसी निरोधात्मक कार्रवाइयां जारी रहेंगी, लेकिन इनका उपयोग किसी को परेशान करने के लिए नहीं किया जा सकेगा। 

'सबका सम्मान, जीवन आसान' के लक्ष्य पर जोर

यह बदलाव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सात निश्चय-3 (2025-2030) के विजन का हिस्सा है। पत्र के माध्यम से कहा गया है कि राज्य के 4.5 करोड़ जमाबंदी धारकों को पारदर्शी और संवेदनशील समाधान देना सरकार की प्राथमिकता है। विजय सिन्हा ने चेतावनी दी है कि यदि किसी पदाधिकारी द्वारा अवैध कब्जा दिलाने या निर्माण कराने की शिकायत मिली, तो उन पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।