वट सावित्री व्रत पर सुहागिन महिलाओं ने की पूजा-अर्चना, सावित्री-सत्यवान की कथा संग की सुहाग के लंबी उम्र की कामना
Vat Savitri Vrat:बिहार के विभिन्न जिलों में वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं द्वारा श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक विधि-विधान के साथ मनाया गया।...
Vat Savitri Vrat: बिहार के विभिन्न जिलों में वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं द्वारा श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक विधि-विधान के साथ मनाया गया। यह पर्व पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की समृद्धि की कामना के लिए किया जाता है।
नवादा जिले के हिसुआ नगर सहित कई स्थानों पर सुबह से ही वट वृक्षों के पास महिलाओं की भीड़ देखी गई। महिलाएं सुबह ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर सोलह श्रृंगार के साथ पूजा स्थल पर पहुंचीं और दिनभर निर्जला व्रत रखा। महादेव मोड़, नरहट रोड बड़ी शिवालय, नगर परिषद परिसर सहित कई स्थानों पर विशेष पूजा का आयोजन हुआ। पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा संपन्न कराई गई, जहां महिलाओं ने वट वृक्ष के चारों ओर कच्चा सूत लपेटकर परिक्रमा की और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी।
बांका जिले के अमरपुर, रजौन, बौंसी, बेलहर, कटोरिया और चांदन जैसे प्रखंडों में भी व्रत को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। गांवों और मंदिर परिसरों में वट वृक्षों के पास सुबह से ही धार्मिक माहौल बना रहा।
पश्चिम चंपारण में भी महिलाओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में विधिवत पूजा की और पंडितों से वट सावित्री व्रत की कथा सुनी। वहां पंडित भरत चतुर्वेदी ने व्रत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह व्रत पति की दीर्घायु और परिवार की यश-कीर्ति बढ़ाने वाला माना जाता है।
नालंदा जिले के बिहारशरीफ में भी धनेश्वर घाट, डाक बंगला चौक, सोहसराय अस्पताल चौक और रामचंद्रपुर जैसे क्षेत्रों में सुहागिन महिलाओं ने पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने वट वृक्ष के नीचे विधि-विधान से पूजा कर अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना की।पूजा के अंत में महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर, चूड़ी और सुहाग सामग्री भेंट कर पारंपरिक उत्सव को और भी भावपूर्ण बना दिया। पूरे बिहार में यह पर्व आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बनकर मनाया गया।
नवादा से अमन कुमार,बांका से चंद्रशेखर भगत, बेतिया से आशीष कुमार और नालंदा से राज पाण्डेय की रिपोर्ट