'मास्टरमाइंड' शिक्षक की सरेराह हत्या: पटना में 52 लाख की बैंक डकैती के सरगना अमन शुक्ला का अंत

पटना के पत्रकार नगर में हुई अमन शुक्ला की हत्या की यह खबर अब एक बड़े मोड़ पर आ गई है। जो व्यक्ति समाज की नजर में सिर्फ एक अंग्रेजी का शिक्षक था, पुलिस की फाइलों में वह एक शातिर बैंक डकैत गिरोह का किंगपिन था!

'मास्टरमाइंड' शिक्षक की सरेराह हत्या:  पटना में 52 लाख की बै
'मास्टरमाइंड' शिक्षक की सरेराह हत्या: पटना में 52 लाख की बैंक डकैती के सरगना अमन शुक्ला का अंत - फोटो : NEWS 4 NATION

पटना के पत्रकार नगर में शिक्षक अमन शुक्ला की सरेआम हत्या ने पुलिस महकमे में हलचल तेज कर दी है। अमन अपनी पत्नी और 8 साल के बच्चे के साथ बाइक पर जा रहे थे, तभी अपराधियों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। लेकिन जांच में जो सच सामने आया है, वह चौंकाने वाला है। अमन शुक्ला केवल अंग्रेजी का शिक्षक नहीं था, बल्कि वह 2020 में अनीसाबाद के पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में हुई 52 लाख की डकैती का मुख्य मास्टरमाइंड भी था।


शिक्षण की आड़ में अपराध का साम्राज्य

अमन शुक्ला का आपराधिक इतिहास बेहद शातिर रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वह पटना के कई प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थानों में अंग्रेजी की क्लास लेता था, लेकिन इसी की आड़ में उसने अपना एक खूंखार गैंग बना रखा था। 2020 की बैंक डकैती के समय तत्कालीन एसएसपी उपेंद्र शर्मा ने खुलासा किया था कि अमन और उसके साथी शिक्षक हरिनारायण ने मिलकर ऐसे लोगों को गैंग में शामिल किया था जिनका कोई पुराना पुलिस रिकॉर्ड न हो। पुलिस ने इन दोनों गैंग लीडर समेत 5 को गिरफ्तार कर लिया था। इनके पास से पुलिस ने 33.13 लाख कैश बरामद किया था । साथ ही 6 लाख की ज्वेलरी, एक लाख की शराब, 5 पिस्टल, 16 राउंड जिंदा कारतूस और घटना में इस्तेमाल तीनों बाइक बरामद भी किया था।गिरफ्तार आरोपियों में गैंग सरगना अमन शुक्ला, हरिनारायण, कंपाउंडर प्रफुल्ल आनंदपुरी, सेंटरिंग मिस्त्री सोनेलालऔर गणेश बुद्धा शामिल थे। तब के पटना एसएसपी उपेंद्र शर्मा ने बताया था  कि 27 जून को हम नतीजे पर पहुंचेकि घटना में अमन शामिल है।

तकनीकी रूप से बेहद शातिर था अमन

अमन शुक्ला अपराध की दुनिया का एक ऐसा खिलाड़ी था जो आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से बचता था। वह न तो मोबाइल फोन का इस्तेमाल करता था और न ही सोशल मीडिया पर उसकी कोई प्रोफाइल थी, ताकि पुलिस उस तक न पहुंच सके। 2020 की डकैती के दौरान भी उसने कहीं भी फोन का इस्तेमाल नहीं किया था। पुलिस ने 60 से ज्यादा कैमरों को खंगालने के बाद उसे दबोचा था। पुलिस को आशंका थी कि वह मुजफ्फरपुर और वैशाली के कई अनसुलझे लूटकांडों में भी शामिल रहा है, क्योंकि वह मुजफ्फरपुर के एक बड़े कोचिंग में HOD भी रह चुका था।

पुरानी रंजिश या गैंगवार का परिणाम?

अमन शुक्ला की इस तरह हुई हत्या को अब गैंगवार या पुरानी रंजिश से जोड़कर देखा जा रहा है। जिस तरह से अपराधियों ने रेकी कर उसे गोलियों से भूना, उससे अंदेशा है कि लूट की रकम के बंटवारे या किसी पुराने विवाद को लेकर यह हमला हुआ है। जेल से बाहर आने के बाद अमन फिर से अपनी पुरानी पहचान (टीचर) के साथ रह रहा था, लेकिन उसके अतीत ने उसे ढूंढ लिया। फिलहाल पुलिस इस पूरे 'क्रिमिनल प्रोफाइल' के आधार पर हत्यारों की तलाश में जुट गई है।