Bihar MLC Election: सज गया विधान परिषद चुनाव का रण , NDA के सभी 9 कैंडिडेट ने किया नामांकन, राजद से सुनील सिंह ने भरा पर्चा ,निशांत-पवन सिंह की एंट्री से बढ़ी सियासी गर्मी

Bihar MLC Election: विधानसभा सचिव कक्ष में उम्मीदवारों ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया, जबकि विधानसभा परिसर दिनभर सियासी हलचल और शक्ति प्रदर्शन का केंद्र बना रहा।

NDA Flexes Strength as Bihar MLC Candidates File Nominations
सज गया विधान परिषद चुनाव का रण- फोटो : reporter

Bihar MLC Election: बिहार की राजनीति में सोमवार का दिन पूरी तरह विधान परिषद चुनाव के नाम रहा। 10 सीटों (9 सामान्य और 1 उपचुनाव) के लिए नामांकन के आखिरी दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष ने अपनी पूरी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया। विधानसभा सचिव कक्ष में उम्मीदवारों ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया, जबकि विधानसभा परिसर दिनभर सियासी हलचल और शक्ति प्रदर्शन का केंद्र बना रहा।

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन  की ओर से सभी 9 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया। इसमें भाजपा और जदयू के 4-4 प्रत्याशी शामिल हैं, जबकि एक सीट पर चिराग पासवान  की पार्टी के उम्मीदवार ने पर्चा भरा। नामांकन के बाद NDA नेताओं ने विधानसभा पोर्टिको में एकजुटता का संदेश देते हुए विक्ट्री साइन दिखाया और अपनी जीत का दावा किया।

सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमारकी मौजूदगी को लेकर रही। नामांकन प्रक्रिया के दौरान जब उनसे उनके पिता को लेकर सवाल पूछा गया तो वह मुस्कुराते नजर आए। वहीं भोजपुरी सिनेमा के चर्चित अभिनेता और गायक पवन सिंह  के नामांकन ने भी राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में खासा ध्यान खींचा।

दूसरी ओर महागठबंधन की तरफ से राजद उम्मीदवार Sunil Singh ने नामांकन दाखिल कर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया। हालांकि संख्या बल के लिहाज से NDA इस चुनाव में मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा है।राजनीतिक जानकारों के अनुसार, विधान परिषद की एक सीट जीतने के लिए लगभग 25 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। मौजूदा गणित को देखें तो NDA के खाते में 9 में से 8 सीटों पर जीत लगभग तय मानी जा रही है, जबकि 10वीं सीट पर भी गठबंधन का पलड़ा भारी नजर आ रहा है।

अब सबकी निगाहें नामांकन वापसी की प्रक्रिया और उम्मीदवारों की अंतिम संख्या पर टिकी हैं। यदि कुल उम्मीदवारों की संख्या उपलब्ध 10 सीटों से अधिक रहती है, तो 18 जून को मतदान कराया जाएगा। लेकिन यदि उम्मीदवारों की संख्या सीटों के बराबर रहती है, तो अधिकांश प्रत्याशियों का निर्विरोध निर्वाचन तय माना जा रहा है।बहरहाल बिहार की सियासत में विधान परिषद चुनाव को लेकर गहमागहमी चरम पर है और सत्ता-विपक्ष दोनों अपने-अपने राजनीतिक समीकरण साधने में जुटे हुए हैं।