NEET Student Rape Death: नीट छात्रा मौत मामले में बड़ा एक्शन, सुबह सुबह डॉ. सहजानंद से पूछताछ करने पहुंची पुलिस, इसी अस्पताल में हुई थी भर्ती
NEET Student Rape Death:
NEET Student Rape Death: राजधानी पटना में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की मौत मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस सुबह सुबह डॉ. सहजानंद के क्लिनिक पर पहुंची है। बताया जा रहा है कि सबसे पहले छात्रा को लेकर हॉस्टल के स्टाफ यहीं पहुंचे थे। पटना पुलिस डॉ. सहजानंद से पूछताछ करने पहुंची है। बता दें कि नीट की तैयारी कर रही छात्रा 6 जनवरी को शंभू गर्ल्स हॉस्टल में अपने कमरे में बेहोश मिली। जिसके बाद उसे डॉ. सहजानंद के क्लिनिक लाया गया जहां से उन्होंने रेफर कर दिया।
डॉ. सहजानंद सिंह से पूछताछ करने पहुंची पुलिस
पुलिस फिलहाल डॉ. सहजानंद से पूछताछ कर रही है। इस घटना के बाद राज्य भर में सियासी पारा हाई है। इस मामले में पुलिस. डॉक्टर सहित कई बड़े चेहरों के शामिल होने की जानकारी मिल रही है। छात्रा 6 जनवरी को अपने कमरे में बेहोश मिली और 9 जनवरी को जिंदगी की जंग हार गई। इस बीच क्या हुआ है कैसे हुआ है इसकी जानकारी किसी को नहीं है और कहीं ना कहीं इस मामले में पुलिस की लापरवाही भी साफ झलक रही है। मृतक जहानाबाद की रहने वाली थी। मृतका के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
थाना प्रभारी ने किया खेल?
वहीं कानून की किताब साफ कहती है कि संदिग्ध हालात में मिली छात्रा का मामला मेडिको-लीगल केस होता है। थाना प्रभारी रौशनी कुमारी को 6 जनवरी को ही FIR की प्रक्रिया शुरू करनी थी, हॉस्टल और कमरे को सील करना था, फोरेंसिक टीम बुलानी थी। लेकिन यहां तो पूरा सीन ही खुला छोड़ दिया गया। न कमरा सील हुआ, न बिस्तर, न कपड़े जब्त हुए। यही वो “गोल्डन टाइम” था, जब सबूत इकट्ठा किए जाते। पुलिस उस वक्त सबसे सुस्त, सबसे खामोश रही।
3 दिनों तक क्या कर रही थी पुलिस
तीन दिन तक पुलिस सीन से गायब रही। इस दौरान हॉस्टल का कमरा खुला रहा, सबूतों से छेड़छाड़ का पूरा मौका मिला। तीन लोगों को हिरासत में लेकर छोड़ दिया गया, लेकिन हॉस्टल की गहन तलाशी नहीं हुई। थाना प्रभारी ने एक कहानी गढ़ दी-सुसाइड की कहानी। उसी स्क्रिप्ट को ASP, SP और SSP तक आगे बढ़ाते रहे। बिना सवाल, बिना क्रॉस-चेक, बिना री-एप्रेजल।
पुलिस भी कटघरे में खड़ा
SP परिचय कुमार ने तो हद ही कर दी। बिना पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मीडिया के सामने जजमेंट सुना दिया-“रेप हुआ ही नहीं।” नींद की गोली और मोबाइल सर्च की कहानी गढ़ी गई। बाद में मेडिकल रिपोर्ट ने इन दावों को उलट दिया। पोस्टमॉर्टम में गर्दन, कंधे, चेस्ट पर नाखूनों के निशान, पीठ पर रगड़ से पड़े नीले धब्बे, और जननांग पर ताज़ा चोट व टिश्यू ट्रॉमा मिले। मेडिकल ओपिनियन साफ था-forceful penetration हुआ, एक से ज्यादा लोग शामिल हो सकते हैं। यह सुसाइड नहीं, यह स्ट्रगल की कहानी है पुलिस ने कहा लड़की नींद की गोली से बेहोश थी, जबकि पोस्टमॉर्टम के मुताबिक सभी चोटें मौत से पहले की थीं। यानी पीड़िता ने विरोध किया। ओवरडोज से चेस्ट नोचने के निशान और कंधों पर गहरे नाखून नहीं आते।
कानून पर उठ रहे सवाल
कानून और मेडिकल प्रोटोकॉल साफ कहते हैं कि जब हालात अस्पष्ट हों, जख़्म बोल रहे हों और कहानी अधूरी हो, तो शुरुआती डॉक्टर की जिम्मेदारी होती है कि रिपोर्ट को रिज़र्व रखा जाए। डॉक्टर का काम इलाज और संकेत दर्ज करना है, कानूनी फैसला सुनाना नहीं। लेकिन प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल में यही उसूल सबसे पहले कुचला गया। डॉक्टर सतीश ने एक तरफ रेप से इनकार किया। सवाल ये कि अगर चोटें थीं, तो आई कैसे? इस पर न पुलिस के पास जवाब है, न डॉक्टर के पास। डॉ. सतीश ने रेप की संभावना से ही इनकार कर दिया। परिजनों का सवाल है कि जिस कपड़े में लड़की अस्पताल पहुंची वो कहां है?