नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट 'दीदी की रसोई' को बड़ा झटका: पुलिस महकमे में बंद हुई सेवाएं

बिहार में महिला सशक्तिकरण का प्रतीक मानी जाने वाली 'दीदी की रसोई' की सेवाएं पुलिस महकमे में पूरी तरह बंद कर दी गई हैं। घाटे, बकाया भुगतान और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण जीविका ने यह बड़ा फैसला लिया है।

Bihar Police Didi Ki Rasoi closed

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जिस 'जीविका' मॉडल को राज्य में महिला सशक्तिकरण का सबसे मजबूत स्तंभ मानते आए हैं, उसी योजना को बड़ा झटका लगा है। गृह विभाग के अंतर्गत संचालित होने वाली 'दीदी की रसोई' की सेवाओं को बंद करने का फैसला लिया गया है। इस संबंध में आधिकारिक पत्र जारी कर दिया गया है, जिससे जीविका के इस बहुचर्चित मॉडल के भविष्य और इसके प्रबंधन को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


आधिकारिक पत्र से सामने आई सेवा बंद करने की सूचना

छपरा से सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, जीविका के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) हिमांशु शर्मा ने 28 जुलाई 2026 (पत्र संख्या: BRLPS/Proj-NF/2499/25/3841) को अपर पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण), गृह विभाग को एक पत्र भेजा है। इस पत्र के माध्यम से आधिकारिक तौर पर गृह विभाग और पुलिस महकमे को सूचित किया गया है कि पुलिस परिसरों में संचालित हो रही 'दीदी की रसोई' की सेवाएं अब पूरी तरह से बंद की जा रही हैं।

'घर जैसा भोजन' और आजीविका देने का था उद्देश्य

पत्र के मुताबिक, "अन्नपूर्णा जीविका फूड प्रोडक्ट्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, पटना" के तत्वाधान में पुलिस मुख्यालय, विभिन्न पुलिस प्रशिक्षण अकादमियों, पुलिस लाइनों एवं अन्य प्रशिक्षण केंद्रों में 'दीदी की रसोई' चलाई जा रही थी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को उचित मूल्य पर 'घर जैसा शुद्ध भोजन' उपलब्ध कराना था। साथ ही, इसके जरिए राज्य की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उनकी आजीविका का एक मजबूत साधन प्रदान करना भी शामिल था।

वित्तीय घाटा और बुनियादी सुविधाओं की कमी बनी बाधा

पत्र में इस योजना को जारी रखने में असमर्थता जताते हुए कई गंभीर व्यावहारिक चुनौतियों का उल्लेख किया गया है। विश्लेषण में पाया गया कि कई इकाइयां लंबे समय से घाटे में चल रही थीं और उनका संचालन आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं रह गया था। इसके अलावा, पुलिस विभाग के उपक्रमों में 'दीदी की रसोई' को सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) और संसाधनों का भारी अभाव भी देखने को मिला।


बकाये का भुगतान न होना और नियमित कार्यादेश की अनिश्चितता

सेवाएं ठप होने का एक बड़ा कारण प्रशासनिक और वित्तीय सुस्ती भी रही। पत्र के अनुसार, कई इकाइयों के पास संचालन के लिए नियमित कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) ही उपलब्ध नहीं था। इसके साथ ही, पुलिस विभाग की ओर से इकाइयों को देय राशि का समय पर और नियमित भुगतान नहीं किया जा रहा था। जीविका के सीईओ ने गृह विभाग से अनुरोध किया है कि बंद करने की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए लंबित बकाया राशि को जल्द से जल्द जारी किया जाए।

प्रशासनिक खामियों से प्रभावित होगी जीविका दीदियों की आमदनी

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जीविका दीदियों के माध्यम से अस्पताल से लेकर विभिन्न सरकारी विभागों तक रोजगार का एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया था। हालांकि, बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी और बकाये का भुगतान न होने जैसी प्रशासनिक लापरवाही के कारण पुलिस महकमे में यह व्यवस्था बंद होने की कगार पर पहुंच गई है। इस फैसले से न केवल सैकड़ों जीविका दीदियों के स्वरोजगार और आमदनी पर सीधा असर पड़ेगा, बल्कि पुलिसकर्मियों को मिलने वाली घर जैसे खाने की सुविधा भी ठप हो जाएगी।

धर्मेन्द्र रस्तोगी की रिपोर्ट