बिहार में निवेश के लिए नहीं है व्यवहार्यता ! बिहार दिवस पर Vedanta Group के चेयरमैंन अनिल अग्रवाल ने व्यक्त की पीड़ा
अनिल अग्रवाल ने अपनी पीड़ा भी व्यक्त की है कि वे क्यों बिहार में किसी प्रकार का व्यापक निवेश नहीं कर पा रहे है जिससे राज्य में औद्योगिक विकास हो।
Bihar Diwas : बिहार रविवार को बिहार दिवस माना रहा है यानी अपनी स्थापना का दिन। बिहार में पिछले वर्षों में हुए विकास की कई गाथाएं पेश की जा रही हैं लेकिन इसी बीच वेदांता ग्रुप के प्रमुख और बिहार मूल के उद्योगपति अनिल अग्रवाल ने बिहार दिवस पर एक खास संदेश दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर किए एक पोस्ट में बिहार से अपने जुड़ाव का जिक्र करते हुए काफी भावुक पोस्ट किया है। वहीं उन्होंने अपनी पीड़ा भी व्यक्त की है कि वे क्यों बिहार में किसी प्रकार का व्यापक निवेश नहीं कर पा रहे है जिससे राज्य में औद्योगिक विकास हो। अपने सोशल मीडिया पोस्ट में अनिल अग्रवाल ने लिखा है कि 'मैं कुछ समय से एक मौका ढूंढ रहा हूँ बिहार में कोई investment करने का, पर भावनाओं के साथ साथ feasibility भी ज़रूरी है।'
यानी बिहार में निवेश के लिए व्यवहार्यता नहीं होने का बड़ा सवाल अनिल अग्रवाल ने उठाया है। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा है - 'मैं कहीं भी रहूँ, मेरे अंदर एक बिहार हमेशा मेरे साथ चलता है। जो 15-20 साल मैंने बिहार में बिताए वह हमेशा से मेरे दिल में बसे हैं। लिट्टी-चोखा की सोंधी महक हो, छठ पूजा का उल्लास भरा माहौल हो, या रोज़मर्रा की कठिनाइयों से लड़ने का हुनर, बिहार हर मोड़ पर याद दिलाता है: मेहनत करो, ईमानदारी से करो और कभी हार मत मानो।
आज भी बिहार के कोने-कोने से जब लोगों के संदेश आते हैं, कोई नौकरी के लिए सलाह मांगता है, कोई पढ़ाई के लिए मदद, कोई अपने ideas share करता है, तब महसूस होता है यह सिर्फ संदेश नहीं हैं, यह अपनेपन का वह रिश्ता है, जो मेरा बिहार के साथ अब तक कायम है। नालंदा की ज्ञान परंपरा से लेकर आर्यभट्ट की प्रतिभा तक, बिहार ने हमेशा भारत को दिशा दी है। और आज देश ही नहीं, दुनिया के हर कोने में बिहार के युवा अपनी पहचान बना रहे हैं।
मैं बिहार के युवतियों और युवाओं से बस तीन बातें कहना चाहता हूँ: - बड़े सपने देखिए, लेकिन अपनी जड़ों को मत भूलिए। - बिहारियों ने शिक्षा को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया है। इसे क़ायम रखना है। - और जहाँ भी जाएँ, गर्व से कहिए कि हम बिहारी हैं।
वे आगे लिखते हैं - मैं कुछ समय से एक मौका ढूंढ रहा हूँ बिहार में कोई investment करने का, पर भावनाओं के साथ साथ feasibility भी ज़रूरी है। आशा है जल्द कुछ हो पाएगा। मेरी ये भी इच्छा है जैसा हमने राजस्थान में दस हज़ार से भी अधिक नंद घर बना के लाखों बच्चों और महिलाओं को सशक्त बनाया है, ठीक वैसे ही बिहार में ऐसा कुछ करें। नंद घर वो centres हैं जहां 6 साल तक के बच्चों को पौष्टिक आहार और शिक्षा मिलती है, और महिलाओं को कौशल विकास के ज़रिए financial independence।
बिहार का एक भी बच्चा भूखे पेट न सोए, और प्रतिभाशील महिलाएं financially independent हों, ये एक सपना नहीं है, बल्कि बहुत जल्द हक़ीक़त होने वाला है। मुझे पूरा विश्वास है आने वाले वर्षों में बिहार भारत की अगली बड़ी कहानी लिखेगा। आप सभी को बिहार दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ। “हम बिहारी, सब पे भारी।”