'ऑक्सीजन मैन' गौरव राय ने मां की 30वीं पुण्यतिथि पर किया 107वां रक्तदान, जरूरतमंद छात्राओं को दी साइकिल
Patna : राजधानी पटना में 'ऑक्सीजन मैन' के नाम से चर्चित 56 वर्षीय समाजसेवी गौरव राय ने अपनी मां की 30वीं पुण्यतिथि के अवसर पर 107वां रक्तदान कर उन्हें अनूठी व भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। गौरव राय का मानना है कि मानव सेवा और रक्तदान से बड़ा कोई पुण्य कार्य नहीं है। रविवार को किए गए इस 107वें रक्तदान के मौके पर उन्होंने संदेश दिया कि एक स्वस्थ व्यक्ति द्वारा किया गया एक यूनिट रक्तदान कम से कम तीन लोगों की जिंदगी बचाने में मददगार साबित होता है। 56 वर्ष की उम्र में भी वे नियमित रक्तदान और समाजसेवा के बल पर पूरी तरह स्वस्थ हैं।
स्कूल आने-जाने में परेशान दो छात्राओं को भेंट की साइकिल
रक्तदान के साथ-साथ गौरव राय ने अपनी मां की स्मृति में दो जरूरतमंद छात्राओं की शिक्षा की राह आसान करने का काम किया। उन्होंने चौधरी टोला और खेमनीचक निवासी दो छात्राओं को नई साइकिल भेंट की। गौरव राय ने बताया कि कुछ दिन पूर्व उन्होंने दोनों बच्चियों को पढ़ाई के लिए कॉपी व स्टेशनरी सामग्री उपलब्ध कराई थी। उसी दौरान उन्हें पता चला कि साधन के अभाव में दोनों को स्कूल जाने में परेशानी हो रही है। इस पर उन्होंने मां की पुण्यतिथि के अवसर पर अपना वादा पूरा करते हुए दोनों छात्राओं को साइकिल सौंपी।
बिना किसी एनजीओ के 327 जरूरतमंदों तक पहुंचाई मदद
अपनी सामाजिक यात्रा के बारे में बताते हुए गौरव राय ने कहा कि वे बिना किसी एनजीओ या संस्था के व्यक्तिगत स्तर पर यह सेवा कार्य संचालित करते हैं। वे अब तक 327 जरूरतमंद लोगों को साइकिल उपलब्ध करा चुके हैं। इस सेवा कार्य के लिए वे अपने वेतन का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा, परिवार और मित्रों का सहयोग तथा सोशल मीडिया के माध्यम से मिले संसाधनों का उपयोग करते हैं। उनके इस निष्काम प्रयास से प्रेरित होकर अब आम लोग भी अपने परिजनों की पुण्यतिथि, बच्चों के जन्मदिन और शादी की सालगिरह पर उनसे जुड़कर सहायता कर रहे हैं।
'समाजसेवा के लिए किसी दफ्तर या बड़े संगठन की जरूरत नहीं'
गौरव राय का मानना है कि सामाजिक सरोकार के कार्यों को पूरा करने के लिए किसी बड़े संगठन या कार्यालय की आवश्यकता नहीं होती। आज की डिजिटल दुनिया में हम अपने आसपास के जरूरतमंद लोगों की समस्याओं और पीड़ा का स्वतः संज्ञान ले सकते हैं। हमारा प्राथमिक उद्देश्य अपने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की पहचान कर उसकी मदद करना और उसके चेहरे पर मुस्कान लाना होना चाहिए। उनके इस अभियान से जुड़कर कई लोग अब सिलाई मशीन और अन्य उपयोगी सामान भी जरूरतमंदों में बांट रहे हैं।
पत्नी अरुणा भारद्वाज का मिलता है निरंतर नैतिक समर्थन
गौरव राय के इस निरंतर जारी सेवा अभियान में उनकी पत्नी अरुणा भारद्वाज की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। गौरव राय ने बताया कि अपने वेतन का बड़ा हिस्सा सामाजिक कार्यों में खर्च करने के बावजूद उनकी पत्नी कभी इस काम में बाधा नहीं बनतीं। इसके विपरीत, हर अभियान और संकट के समय में उनका अटूट नैतिक समर्थन और प्रेरणा मिलती रहती है। पारिवारिक सहयोग, दृढ़ संकल्प और निस्वार्थ भावना के बल पर गौरव राय का यह मानवीय अभियान पूरे बिहार में प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।
प्रिय दर्शन की रिपोर्ट