Patna News: दशहरा से पहले पटना में नगर निगम के दावों की खुली पोल, वादा हुआ फेल, अंधेरे में डूबे शहर के प्रमुख मार्ग

Patna News: दशहरा से पहले राजधानी पटना को दूधिया रोशनी से जगमग करने का नगर निगम का दावा अब हकीकत की कसौटी पर दम तोड़ता नजर आ रहा है।

Patna Civic Body Fails

Patna News: दशहरा से पहले राजधानी पटना को दूधिया रोशनी से जगमग करने का नगर निगम का दावा अब हकीकत की कसौटी पर दम तोड़ता नजर आ रहा है। शहर में 7,500 से अधिक स्ट्रीट लाइटें लगाने और खराब लाइटों की मरम्मत कराने का ऐलान तो किया गया, लेकिन धरातल पर काम की रफ्तार बेहद सुस्त है। हालात ऐसे हैं कि शहर के प्रमुख मार्गों से लेकर कई फ्लाईओवर और रिहायशी इलाकों तक अंधेरे की गिरफ्त में हैं। त्योहार से पहले रोशनी की व्यवस्था दुरुस्त करने के दावों पर सवाल उठने लगे हैं।

नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाते हुए वार्ड संख्या 28 के पार्षद विनय कुमार पप्पू ने प्रशासन को पत्र लिखकर बदहाल प्रकाश व्यवस्था की ओर ध्यान आकृष्ट कराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि डाकबंगला चौराहा, फ्रेजर रोड, एग्जीबिशन रोड और स्टेशन रोड जैसे महत्वपूर्ण मार्गों पर करीब 75 फीसदी स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। ये सड़कें राजधानी की व्यस्ततम सड़कों में शामिल हैं, जहां अंधेरे के कारण आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

75 वार्डों में 100-100 लाइटें लगाने की योजना भी सुस्त

नगर निगम ने शहर के सभी 75 वार्डों में 100-100 नई स्ट्रीट लाइटें लगाने की योजना बनाई है। लेकिन इस महत्वाकांक्षी योजना की रफ्तार देखकर सवाल उठ रहा है कि दशहरा से पहले लक्ष्य कैसे पूरा होगा। स्थानीय लोग अपनी नाराजगी पार्षदों के सामने जाहिर कर रहे हैं, जबकि लाइटें लगाने और मरम्मत कराने की सीधी जिम्मेदारी निगम प्रशासन की है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच जवाबदेही का सवाल भी चर्चा में है।

अटल पथ से अशोक राजपथ तक कई हिस्सों में रोशनी की स्थिति संतोषजनक नहीं है। कंकड़बाग कॉलोनी की सर्विस लेन और मुख्य सड़क पर भी अंधेरा पसरा हुआ है। वहीं, बाइपास से सटी कॉलोनियों और प्रमुख मार्गों पर भी कई लाइटें अब तक चालू नहीं हो सकी हैं। इससे रात में आवागमन करने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ रही हैं।

रोज 500 लाइटें ठीक करने का लक्ष्य, फिर भी अंधेरा बरकरार

नगर निगम प्रशासन का दावा है कि खराब स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत के लिए 31 टीमों को मैदान में उतारा गया है। प्रतिदिन औसतन 500 लाइटें दुरुस्त करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है। इसके बावजूद प्रमुख सड़कों पर शाम ढलते ही अंधेरा छा जाना निगम के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर उजागर कर रहा है।

घाटों पर मरम्मत, लेकिन पूरे शहर में रोशनी की चुनौती

निगम के मुताबिक, दुर्गापूजा को देखते हुए प्रमुख सार्वजनिक स्थलों और गंगा घाटों के पहुंच पथों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। भद्रघाट और महावीर घाट के पहुंच पथों की लाइटें ठीक कर दी गई हैं। प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय से राजापुर पुल, ऑफिसर्स फ्लैट, छज्जूबाग, भट्टाचार्या रोड, बुद्धमार्ग और गायघाट गुरुद्वारा से सिविल कोर्ट तक के हिस्सों में भी मरम्मत पूरी करने का दावा किया गया है।

अब सवाल यह है कि जब मरम्मत के लिए टीमें तैनात हैं और रोजाना सैकड़ों लाइटें ठीक करने का लक्ष्य है, तो राजधानी की प्रमुख सड़कों पर अंधेरा क्यों कायम है? दशहरा से पहले नगर निगम को अपने दावों को जमीन पर उतारना होगा, वरना त्योहार के दौरान शहर की बदहाल प्रकाश व्यवस्था प्रशासनिक तैयारियों पर भारी पड़ सकती है।

हीरेश कुमार