पटना की छात्राओं पर दोहरी मार: शादी का झांसा देकर शोषण, सोशल मीडिया पर ब्लैकमेलिंग और प्रोफेसरों पर गंभीर आरोप

राजधानी पटना के शैक्षणिक माहौल और बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। पिछले 6 महीनों में महिला थाना और महिला आयोग में प्रेम में धोखे, सोशल मीडिया ब्लैकमेलिंग और रिसर्च गाइड द्वारा प्रताड़ना के 103 मामले दर्ज किए गए हैं।

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पटना के शैक्षणिक माहौल और बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंताजनक आंकड़े - फोटो : news 4 nation AI

बिहार की राजधानी पटना से एक बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक खुलासा हुआ है। महिला थाने और महिला आयोग में दर्ज आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि जिले में प्रेम में धोखे और प्रताड़ना के मामलों में अप्रत्याशित रूप से भारी उछाल आया है। पिछले छह महीनों (जनवरी से जून) के भीतर ही सैकड़ों शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें कॉलेज और विश्वविद्यालयों से जुड़ी छात्राओं की संख्या सबसे अधिक है। इन आंकड़ों ने राजधानी के शैक्षणिक माहौल और बेटियों की सामाजिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण का सबसे आम पैटर्न

महिला थाना और महिला आयोग में इस अवधि के दौरान कुल 103 गंभीर शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से सबसे अधिक 82 मामले सीधे तौर पर प्रेम संबंध के बाद धोखे और शादी से साफ इनकार करने से जुड़े हैं। दर्ज मामलों के अनुसार, युवकों ने पहले युवतियों को प्रेम जाल में फंसाया और फिर शादी का झूठा वादा कर लंबे समय तक उनके साथ शारीरिक संबंध बनाए। बाद में, जब शादी का दबाव बढ़ा, तो अधिकांश युवकों ने परिवार की मर्जी या सामाजिक दबाव का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लिया, जिसके बाद पीड़ित छात्राओं को थाने की शरण लेनी पड़ी।


सोशल मीडिया से दोस्ती, फिर निजी तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेलिंग

डिजिटल युग में तकनीक का दुरुपयोग भी इन मामलों में खुलकर सामने आ रहा है। कई शिकायतों में यह पैटर्न देखा गया है कि युवक-युवती की दोस्ती पहले फेसबुक, इंस्टाग्राम या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शुरू हुई, जो धीरे-धीरे प्रेम संबंध में बदल गई। इसके बाद आरोपियों ने युवतियों को झांसे में लेकर उनकी निजी तस्वीरें और वीडियो हासिल कर लिए। संबंध टूटने या शादी से मुकरने के बाद, अब इन्हीं निजी तस्वीरों के आधार पर पीड़िताओं को ब्लैकमेल करने और उनसे पैसों की मांग करने की खौफनाक घटनाएं भी सामने आ रही हैं।


रिसर्च स्कॉलर छात्राओं का आरोप: प्रोफेसर कर रहे मानसिक प्रताड़ना

इस रिपोर्ट में केवल प्रेम में धोखे के ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा के मंदिरों को शर्मसार करने वाले मामले भी उजागर हुए हैं। कुल दर्ज मामलों में से 11 मामलों में रिसर्च स्कॉलर (पीएचडी) छात्राओं ने अपने ही गाइड और प्रोफेसरों पर मानसिक प्रताड़ना और अनावश्यक दबाव डालने के संगीन आरोप लगाए हैं। छात्राओं का कहना है कि उनके शोध कार्य (Research Work) को जानबूझकर प्रभावित किया जाता है और अनुचित मांगें पूरी न होने पर करियर बर्बाद करने की धमकियां दी जा रही हैं।


महिला आयोग ने जताई चिंता, मुस्तैदी से कार्रवाई और जागरूकता की अपील

इन डराने वाले आंकड़ों पर महिला आयोग की अध्यक्ष अप्सरा मिश्रा ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि कॉलेज और यूनिवर्सिटी जाने वाली छात्राओं के सामने अब केवल पढ़ाई-लिखाई की नहीं, बल्कि सामाजिक और डिजिटल सुरक्षा की भी बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। महिला थाना और आयोग ने संयुक्त रूप से कहा है कि सभी प्राप्त शिकायतों पर कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जा रही है। साथ ही, उन्होंने छात्राओं से अपील की है कि वे किसी भी तरह के झांसे या प्रताड़ना को सहने के बजाय, शुरुआत में ही तुरंत पुलिस या आयोग के पास अपनी शिकायत दर्ज कराएं।