3 महीने में खाली करें आद्रभूमि, वरना नपेंगे अधिकारी! पटना हाईकोर्ट ने लगाई कबरताल और बर्ड सैंक्चुअरी में अवैध निर्माण पर रोक, 14 हजार एकड़ जमीन का माँगा हिसाब
Patna - पटना हाईकोर्ट ने बिहार के प्रमुख आद्रभूमि (Wetlands) और अभ्यारण्यों के आसपास फैले अतिक्रमण पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने 'वेटेरन फोरम फॉर ट्रांसपेरंसी इन पब्लिक लाइफ' की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को इन क्षेत्रों को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त करने का सख्त निर्देश दिया है।
बेगूसराय और जमुई के अभ्यारण्यों पर संकट
अदालत में सुनवाई के दौरान अधिवक्ता दीनू कुमार ने राज्य की तीन महत्वपूर्ण आद्रभूमियों की बदहाली का मुद्दा उठाया। इनमें बेगूसराय का प्रसिद्ध कबरताल (कँवर झील) और जमुई जिले के नेगी व नकटी बर्ड सैंक्चुअरी शामिल हैं। उन्होंने कोर्ट को बताया कि 1989 की सरकारी अधिसूचना के अनुसार, कँवर झील पक्षी अभ्यारण्य का क्षेत्रफल 420.28 एकड़ है, लेकिन यहाँ बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हो चुका है।
14 हजार एकड़ भूमि की बंदोबस्ती का पेच

सुनवाई में यह तथ्य सामने आया कि कुल 15,780 एकड़ भूमि में से केवल 1,564 एकड़ भूमि की ही बंदोबस्ती की गई है। शेष लगभग 14,000 एकड़ भूमि की अब तक बंदोबस्ती नहीं हुई है और यह बेगूसराय जिला प्रशासन के नियंत्रण में है। कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि 2017 के नियमों के तहत बिना अनुमति निर्माण पर पाबंदी होने के बावजूद सरकार ने अब तक इन जमीनों की घेराबंदी (Fencing) नहीं की है।
अवैध निर्माणों में प्रशासन की 'मिलीभगत' पर सवाल
पटना हाईकोर्ट ने जयमंगलगढ़, बेगूसराय में अवैध रूप से बने स्कूल, मंदिर, धर्मशाला, किसान भवन और पंचायत भवन जैसे निर्माणों पर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने इन अवैध निर्माणों में जिला प्रशासन की कथित मिलीभगत के आरोपों को गंभीरता से लिया है। पिछली सुनवाई में ही इन अवैध निर्माणों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई थी।
अतिक्रमणकारियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था का निर्देश
जयमंगलगढ़ क्षेत्र में लगभग 335 अविभाजित परिवार अवैध रूप से रह रहे हैं। अदालत ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि इन परिवारों के लिए अस्थायी रहने की व्यवस्था की जाए, लेकिन अभ्यारण्य क्षेत्र को हर हाल में अतिक्रमण मुक्त कराया जाए। इसके लिए सरकार को तीन महीने की मोहलत दी गई है।
अगली सुनवाई में पेश होगी 'कार्रवाई रिपोर्ट'
चूँकि सरकार ने स्वयं अतिक्रमण हटाने का निर्णय लिया है, इसलिए हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई में विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट (Action Taken Report) पेश करने का निर्देश दिया है। इसमें अतिक्रमण हटाने, चारदिवारी निर्माण और भूमि बंदोबस्ती से जुड़े कार्यों का पूरा ब्यौरा माँगा गया है। मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल, 2026 को तय की गई है।