Patna High Court: जमीन की हवस में खून की लिखी गई इबारत, महाभारत का हवाला देकर पटना हाईकोर्ट ने कातिलों की फांसी रखी बरकरार

Patna High Court: जमीन के एक टुकड़े ने जब इंसानियत का गला घोंट दिया, तब अदालत ने इतिहास, धर्म और कानून तीनों की गवाही के साथ इंसाफ़ का फरमान सुनाया...

Patna HC upholds death penalty cites Mahabharata in land gra
जमीन की हवस में खून की लिखी गई इबारत- फोटो : social Media

Patna High Court: जमीन के एक टुकड़े ने जब इंसानियत का गला घोंट दिया, तब अदालत ने इतिहास, धर्म और कानून तीनों की गवाही के साथ इंसाफ़ का फरमान सुनाया। पटना हाईकोर्ट ने भूमि विवाद में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की निर्मम हत्या के मामले में दो दोषियों को दी गई मौत की सजा को बरकरार रखते हुए साफ कर दिया कि यह अपराध “दुर्लभतम से भी दुर्लभ” की श्रेणी में आता है। न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति सौरेंद्र पांडे की खंडपीठ ने दोषियों की आपराधिक अपील खारिज करते हुए कहा यह सिर्फ कत्ल नहीं, बल्कि रिश्तों, भरोसे और समाज पर किया गया खूनी हमला है।

22 जनवरी 2026 के अपने फैसले में कोर्ट ने महाभारत का हवाला देते हुए कहा कि इतिहास गवाह है जब सत्ता और ज़मीन की हवस रिश्तों पर भारी पड़ती है, तो अंजाम विनाश ही होता है। अदालत ने टिप्पणी की कि जैसे महाभारत में कौरव आक्रमणकारी थे और अंततः ईश्वरीय दंड के शिकार हुए, वैसे ही इस केस के अपीलकर्ता भी अपने पाप से बच नहीं सकते। कोर्ट ने कहा कि इन दोषियों ने सिर्फ तीन पुरुषों की जान नहीं ली, बल्कि तीन महिलाओं को ज़िंदा लाश बना दिया और बच्चों को उम्रभर के लिए रुला दिया।

हाईकोर्ट ने साफ कहा कि यह मामला दीवानी अदालत में सुलझ सकता था, लेकिन आरोपियों की फितरत ही खून की थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जिस बर्बरता का खुलासा हुआ, वह रूह कंपा देने वाली है। तलवारों से किए गए वार, लगातार पीछा और निर्मम हत्या यह सब किसी क्षणिक गुस्से का नतीजा नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश थी।

यह मामला रोहतास जिले के खुदराव गांव का है, जहां 13 जुलाई 2021 की शाम ज़मीन की जुताई को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते-देखते खूनखराबे में बदल गया। विजय सिंह और उनके बेटे दीपक व राकेश सिंह ने जब विरोध किया, तो पहले लाठी-डंडों से हमला हुआ, फिर तलवारें निकलीं और तीनों को मौत के घाट उतार दिया गया। निचली अदालत ने 2 मई 2024 को अमन सिंह और सोनल सिंह को दोषी ठहराया और 9 मई को फांसी की सजा सुनाई।

हाईकोर्ट ने उस फैसले पर मुहर लगाते हुए दो टूक कहा ज़मीन के लिए निजी इंतकाम और खूनी खेल किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। यह फैसला सिर्फ सजा नहीं, बल्कि समाज के लिए एक सख़्त पैग़ाम है कि कानून के राज में दरिंदगी की कोई जगह नहीं।