भारी भरकम फीस का चक्कर खत्म! पटना हाई कोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन चुनाव को लेकर आया बड़ा फैसला, अब हर वकील लड़ सकेगा चुनाव

पटना हाई कोर्ट में एडवोकेट्स एसोसिएशन चुनाव के नामांकन शुल्क विवाद का समाधान हो गया है। कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद बढ़ी हुई फीस में भारी कटौती की गई है। पढ़ें पूरी खबर।

भारी भरकम फीस का चक्कर खत्म! पटना हाई कोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन

Patna :पटना हाई कोर्ट के एडवोकेट्स एसोसिएशन चुनाव के लिए नामांकन शुल्क में हुई भारी वृद्धि को लेकर चल रहा गतिरोध अब पूरी तरह समाप्त हो गया है। जस्टिसअजीत कुमारकी एकल पीठ के समक्ष हुई सुनवाई में सभी पक्षों के बीच आम सहमति बनने के बाद अदालत ने इस याचिका का निष्पादन कर दिया। कोर्ट के इस हस्तक्षेप से अब सामान्य अधिवक्ताओं के लिए चुनाव लड़ने का रास्ता साफ हो गया है।

25 हजार तक पहुंच गया था शुल्क, अधिवक्ताओं ने किया था विरोध

विवाद की मुख्य वजह आगामी 17 अप्रैल, 2026 को होने वाले चुनाव के लिए तय किया गया भारी-भरकम नामांकन शुल्क था। अधिवक्ता सरोज कुमार द्वारा दायर याचिका में बताया गया था कि जो शुल्क पहले महज 500 से 1000 रुपये के बीच हुआ करता था, उसे अचानक बढ़ाकर 20 हजार से 25 हजार रुपयेकर दिया गया था। दलील दी गई थी कि इतनी अधिक राशि होने के कारण सामान्य और युवा अधिवक्ताओं के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा लेना मुश्किल हो रहा था।

सहमति के बाद 25% पर हुआ समझौता

सुनवाई के दौरान बिहार स्टेट बार काउंसिल ने पहले शुल्क में 50 प्रतिशत की कटौती का प्रस्ताव रखा। हालांकि, लंबी चर्चा और अधिवक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए अंततः सभी पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि बढ़ी हुई फीस को घटाकर मूल बढ़ी हुई राशि का 25 प्रतिशतकर दिया जाए। यानी अब अधिवक्ताओं को पूर्व घोषित भारी शुल्क का केवल एक चौथाई हिस्सा ही जमा करना होगा।

कोर्ट में पेश किया गया समझौता ज्ञापन (MoU)

शुल्क कटौती के इस निर्णय को औपचारिक रूप देने के लिए अदालत में एकसमझौता ज्ञापन (MoU) भी प्रस्तुत किया गया। कोर्ट ने इस समझौते को स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि संशोधित शुल्क को तुरंत अधिसूचित किया जाए। साथ ही, अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए ताकि एसोसिएशन की गरिमा बनी रहे।

प्रचार सामग्री पर भी कोर्ट की नसीहत

नामांकन शुल्क के अलावा, अदालत ने चुनाव प्रचार के तौर-तरीकों पर भी टिप्पणी की। जस्टिस अजीत कुमार की पीठ ने निर्देश दिया कि चुनाव के दौरानपोस्टर और पंपलेटका सीमित उपयोग किया जाए। कोर्ट का उद्देश्य प्रचार के दौरान होने वाली फिजूलखर्ची और गंदगी को रोकना है, जिससे पेशेवर मर्यादा बनी रहे। अब संशोधित शुल्क के साथ चुनाव की तैयारियां नए सिरे से शुरू होंगी।