पटना में आज हाई-लेवल मीटिंग, जदयू तय करेगा नया चेहरा, कौन होगा नीतीश का उत्तराधिकारी?

Bihar Politics: पटना के 1 अणे मार्ग स्थित बैठक में आज जदयू विधायक दल की अहम बैठक बुलाई गई है, जिसकी अध्यक्षता स्वयं नीतीश कुमार करेंगे।

Patna High Level Meet JDU to Decide Nitish Kumar Successor
जदयू में कौन होगा नीतीश का उत्तराधिकारी?- फोटो : social Media

Bihar Politics: बिहार की सियासत इस वक्त एक ऐसे नाज़ुक मोड़ पर खड़ी है जहाँ पुराने समीकरण टूट चुके हैं और नए सियासी तख़्त की बुनियाद रखी जा रही है। मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद राज्य का पूरा राजनीतिक नक्शा बदल गया है। भाजपा विधानमंडल दल के नेता सम्राट चौधरी ने नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर सत्ता की कमान संभाल ली है, जिससे एनडीए के भीतर शक्ति संतुलन पूरी तरह नए ढंग से परिभाषित हो गया है।

इधर, जदयू के भीतर हलचल तेज है। पार्टी, जो लगभग दो दशकों तक नीतीश कुमार के करिश्माई नेतृत्व में चलती रही, अब पहली बार स्पष्ट नेतृत्व संकट और कमान के खालीपन से जूझ रही है। पटना के 1 अणे मार्ग स्थित बैठक में आज जदयू विधायक दल की अहम बैठक बुलाई गई है, जिसकी अध्यक्षता स्वयं नीतीश कुमार करेंगे। इस बैठक में विधायक दल के नए नेता और उपनेता का चयन किया जाएगा, जो आने वाले समय में पार्टी की दिशा और दशा तय करेगा।

यह बैठक महज़ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि जदयू के राजनीतिक भविष्य का निर्णायक मोड़ है। राजनीतिक गलियारों में इसे नीतीश युग के बाद का पहला बड़ा इम्तिहान माना जा रहा है। सवाल यह है कि क्या जदयू अपने अनुभव और परंपरा के सहारे आगे बढ़ेगा या फिर नई पीढ़ी के किसी चेहरे को कमान सौंपकर बदलाव की राह अपनाएगा।

पार्टी के भीतर विजय कुमार चौधरी और विजेंद्र प्रसाद यादव जैसे वरिष्ठ नेताओं के नाम सबसे आगे चल रहे हैं। दोनों नेताओं के पास प्रशासनिक अनुभव और संगठन पर पकड़ है, लेकिन असली लड़ाई सिर्फ नाम की नहीं बल्कि राजनीतिक समीकरणों की है। सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी को विधायक दल का नया नेता बनाए जाने की प्रबल संभावना है, हालांकि अंतिम फैसला सर्वसम्मति से लिया जाएगा। नीतीश कुमार भले ही अब राज्यसभा के जरिए केंद्र की राजनीति में सक्रिय हो चुके हों, लेकिन जदयू में उनका प्रभाव अब भी निर्णायक माना जा रहा है। यही वजह है कि यह माना जा रहा है कि नया नेतृत्व उनकी सहमति और रणनीतिक मार्गदर्शन के बिना तय नहीं होगा।

सम्राट चौधरी की नई सरकार को 24 अप्रैल को विधानसभा में विश्वास मत हासिल करना है, और उससे पहले जदयू का यह फैसला एनडीए की स्थिरता के लिए बेहद अहम साबित होगा। बिहार की राजनीति आज एक ऐसे दौर में प्रवेश कर चुकी है जहाँ हर फैसला आने वाले कई वर्षों की सियासी दिशा तय करेगा और यही वजह है कि यह बैठक सिर्फ चयन नहीं, बल्कि सत्ता-संतुलन की नई इबारत लिखने जा रही है।