नीतीश सरकार को झटका!, करोड़ों की संपत्ति और घर में मिला कैश,बिहार सरकार ने आरोपी डीटीओ को दी कड़ी सजा, सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे दे दी राहत
बिहार के मुजफ्फरपुर के पूर्व DTO रजनीश लाल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। निगरानी जांच में 78.97 लाख की अवैध संपत्ति प्रमाणित होने के बाद उनकी दो वेतनवृद्धि रोकने का आदेश जारी किया गया है। पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।
Patna - बिहार सरकार ने मुजफ्फरपुर के तत्कालीन जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) रजनीश लाल (बि.प्र.से.) के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई करते हुए कड़ी सजा सुनाई है । भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के प्रमाणित आरोपों के आधार पर सरकार ने उनकी दो वेतनवृद्धि संचयात्मक प्रभाव से रोकने का दंड अधिरोपित किया है ।
निगरानी छापे में मिली थी आय से अधिक संपत्ति
यह मामला 22 जून 2021 का है, जब निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने रजनीश लाल के विरुद्ध निगरानी थाना कांड सं.-23/21 दर्ज किया था । उन पर अपने पद का दुरुपयोग कर वैध आय से 78,97,589 रुपये अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप था । जांच के दौरान उनके आवास से भारी मात्रा में नकद बरामदगी हुई थी । इस मामले के बाद उन्हें 9 जुलाई 2021 को निलंबित कर दिया गया था, हालांकि जनवरी 2024 में उन्हें निलंबन मुक्त कर दिया गया था ।
जांच में दावों की खुली पोल

अनुशासनिक कार्रवाई के दौरान श्री लाल ने अपना बचाव करते हुए तर्क दिया था कि बरामद 40 लाख रुपये एक फ्लैट की बिक्री के लिए मिले अग्रिम (Advance) थे । उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पास मौजूद पांच अचल संपत्तियों में से चार उनके पिता और ससुर द्वारा खरीदी गई थीं । हालांकि, अनुशासनिक प्राधिकार ने पाया कि कैश लेनदेन के लिए पेश किया गया सेल डीड रजिस्टर्ड नहीं था । भारी नकद लेनदेन के संबंध में वे संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके । अपने परिवार के सदस्यों के नाम खरीदी गई संपत्तियों का विवरण वार्षिक संपत्ति विवरणी में न देना बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-19 का स्पष्ट उल्लंघन है ।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बदला गया दंड
शुरुआत में अनुशासनिक प्राधिकार ने उन्हें 'निन्दन' (Censure) और 'तीन वेतनवृद्धि रोकने' का दंड दिया था । लेकिन बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने सुप्रीम कोर्ट के 'एस.सी. पराशर' मामले का हवाला देते हुए परामर्श दिया कि एक ही आदेश में लघु (Minor) और वृहद् (Major) दंड एक साथ नहीं दिए जा सकते । इसके आलोक में सरकार ने पूर्व के आदेश को संशोधित करते हुए अब केवल दो वेतनवृद्धि संचयात्मक प्रभाव से रोकने का अंतिम दंड निर्धारित किया है ।
वर्तमान में रजनीश लाल सीतामढ़ी में अपर समाहर्ता (लोक शिकायत निवारण) के पद पर तैनात हैं । सरकार ने इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित करने का आदेश दिया है ।