Bihar Political Strategy:बिहार की सत्ता का नया भूगोल, सम्राट कैबिनेट में मिथिला का दबदबा,सीवान-छपरा को झटका, 24 जिलों को मिला प्रतिनिधित्व,पढ़िए सम्राट सरकार में क्षेत्रीय दबदबे की पूरी तस्वीर

Bihar Political Strategy: क्षेत्रीय समीकरणों की बात करें तो मिथिला क्षेत्र इस बार सबसे मजबूत स्थिति में रहा, जहां से कुल 7 मंत्री बनाए गए हैं। इसके बाद तिरहुत, अंग और मगध से 6-6 मंत्रियों को स्थान मिला है। ...

Samrat Cabinet Map 24 Districts Represented 14 Left Out in B
बिहार में नया सियासी नक्शा- फोटो : Hiresh Kumar

Bihar Political Strategy: बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में गठित मंत्रिमंडल को केवल सत्ता का विस्तार नहीं, बल्कि एक सुनियोजित क्षेत्रीय संतुलन और सियासी भूगोल की पुनर्संरचना माना जा रहा है। इस कैबिनेट में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों को साधने की कोशिश स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, हालांकि कुछ क्षेत्रों का दबदबा अपेक्षाकृत अधिक रहा।

क्षेत्रीय समीकरणों की बात करें तो मिथिला क्षेत्र इस बार सबसे मजबूत स्थिति में रहा, जहां से कुल 7 मंत्री बनाए गए हैं। इसके बाद तिरहुत, अंग और मगध से 6-6 मंत्रियों को स्थान मिला है। वहीं शाहाबाद से 3, सीमांचल, कोसी और सारण से 2-2 मंत्रियों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। सबसे कम प्रतिनिधित्व चंपारण क्षेत्र को मिला है, जहां से केवल 1 मंत्री शामिल किए गए हैं।

हालांकि इस बार सीवान और छपरा जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जिलों को मंत्रिमंडल में कोई जगह नहीं मिल पाई है, जबकि गोपालगंज से 2 मंत्री बनाए गए हैं। कुल मिलाकर इस मंत्रिमंडल में 24 जिलों को प्रतिनिधित्व मिला है, जबकि 14 जिले अभी भी सत्ता में भागीदारी का इंतजार कर रहे हैं।

मगध क्षेत्र से संतोष सुमन, प्रमोद कुमार चंद्रवंशी और विजय कुमार सिन्हा जैसे नेताओं को शामिल किया गया है। वहीं अंग क्षेत्र से मुख्यमंत्री स्वयं सम्राट चौधरी, श्रेयसी सिंह और दामोदर रावत जैसे नाम सामने आए हैं।

मिथिला क्षेत्र से नीतीश मिश्रा, शीला मंडल और अरुण शंकर प्रसाद जैसे नेताओं को जगह मिली है, जबकि वैशाली और मुजफ्फरपुर जैसे तिरहुत क्षेत्र से दीपक प्रकाश और लखेंद्र रौशन को शामिल किया गया है।

पटना जिले से केवल रामकृपाल यादव को प्रतिनिधित्व मिला है, जबकि चंपारण से नंदकिशोर राम को स्थान दिया गया है। कोसी क्षेत्र से बिजेंद्र प्रसाद यादव और रत्नेश सादा जैसे नाम शामिल हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मंत्रिमंडल बिहार की क्षेत्रीय सियासी इंजीनियरिंग का स्पष्ट उदाहरण है, जहां मिथिला और तिरहुत को मजबूत आधार देने के साथ-साथ अंग और मगध जैसे क्षेत्रों को भी संतुलित प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है। हालांकि कुछ क्षेत्रों की अनुपस्थिति आने वाले समय में राजनीतिक बहस का विषय बन सकती है।