Sushil Modi Birth Anniversary : दिवंगत सुशील मोदी को याद कर भावुक हुए वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी, कहा- अपने ‘शानदार विरोधी’ की स्मृतियों को नमन करता हूँ
Sushil Modi Birth Anniversary : दिवंगत सुशिल मोदी को शानदार विरोधी कहते हुए वरिष्ठ नेता शिवानन्द तिवारी ने अपनी श्रद्धांजली दी है. कहा की मोदी भाजपा में 'सोशल इंजीनियरिंग' के उन शुरुआती चेहरों में से एक थे....
PATNA : बिहार की राजनीति के शिखर पुरुष रहे सुशील कुमार मोदी की आज जयंती है। इस अवसर पर उनके पुराने साथी और वैचारिक प्रतिद्वंद्वी शिवानंद तिवारी ने उन्हें याद करते हुए उनके व्यक्तित्व के उन पहलुओं को साझा किया है, जो उन्हें भाजपा के अन्य नेताओं से अलग खड़ा करते थे। जेपी आंदोलन के समय से शुरू हुआ यह सफर बांकीपुर जेल की सलाखों से होता हुआ बिहार विधानसभा तक पहुँचा, जहाँ दोनों ने अलग-अलग धाराओं में रहकर भी आपसी सद्भाव को कभी कम नहीं होने दिया।
संस्मरण के अनुसार, सुशील मोदी बिहार भाजपा में 'सोशल इंजीनियरिंग' के उन शुरुआती चेहरों में से एक थे, जिन्हें गोविंदाचार्य जी ने आगे बढ़ाया था। उस दौर में जब जनसंघ और भाजपा के शुरुआती दिनों में ऊंची जातियों का वर्चस्व था, सुशील मोदी, नंदकिशोर यादव और प्रेम कुमार जैसे पिछड़ी जाति के युवाओं ने अपनी मेहनत से नेतृत्व के द्वार खोले। तिवारी याद करते हैं कि सुशील मोदी के पास बिहार की राजनीति का संपूर्ण नक्शा उनके दिमाग में रहता था और वे अपने कार्यकर्ताओं को नाम से पहचानने वाले एक कुशल संगठनकर्ता थे।
बांकीपुर जेल के दिनों को याद करते हुए शिवानंद तिवारी लिखते हैं कि सुशील मोदी और वे, दोनों ही जेल में किताबों के शौकीन थे। यह सुशील मोदी ही थे जिन्होंने जेल में उन्हें दिनकर की कालजयी रचना 'संस्कृति के चार अध्याय' पढ़वाई थी। हालांकि, जेल प्रशासन से टकराने और आम कैदियों की समस्याओं को लेकर दोनों के बीच तीखे मतभेद भी हुए, लेकिन इन मतभेदों ने कभी उनके व्यक्तिगत संबंधों की मिठास को कम नहीं किया। मोदी एक ऐसे नेता थे जो तथ्यों के आधार पर बात करते थे और अपनी पार्टी के सिद्धांतों पर अडिग रहते थे।
लेख में सुशील मोदी की उदारवादी छवि और उनके निजी जीवन की सुचिता पर विशेष प्रकाश डाला गया है। शिवानंद तिवारी ने बताया कि सुशील मोदी ने कभी सांप्रदायिकता के आधार पर नफरत की भाषा नहीं बोली। उनका विवाह एक ईसाई युवती जेसिका से हुआ था, जिसे उन्होंने बिना धर्म परिवर्तन के आर्य समाज की विधि से अपनाया। इस विवाह में अटल बिहारी वाजपेयी ने भी शिरकत की थी। तिवारी ने तुलनात्मक रूप से यह भी उल्लेख किया कि मोदी जी ने आधुनिक और समावेशी सोच का परिचय दिया, जो आज के समय में बहुत कम देखने को मिलता है।
लालू प्रसाद यादव के सबसे ताकतवर दौर में सुशील मोदी ही वह नेता थे, जो विपक्ष की आवाज बनकर उन्हें मजबूती से जवाब देते थे। उन पर लगे व्यक्तिगत आरोपों को उन्होंने हमेशा चुनौती दी, जो कभी सच साबित नहीं हो सके। शिवानंद तिवारी ने अपनी श्रद्धांजलि के अंत में एक गहरी चिंता व्यक्त की है कि सुशील मोदी जैसे पुराने नेताओं के जाने के बाद जो राजनीतिक खालीपन पैदा हुआ है, उसे भरने वाला व्यक्तित्व फिलहाल दिखाई नहीं देता। उन्होंने अपने 'शानदार विरोधी' की स्मृति को नमन करते हुए उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी है।