नीट यूजी विरोध प्रदर्शनकारियों पर केस वापसी लोकतंत्र के हित में फैसला, अभियंताओं की प्रताड़ना तुरंत बंद हो : डॉ. सुनील कुमार चौधरी
बिहार अभियंत्रण सेवा संघ के पूर्व महासचिव डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने नीट यूजी परीक्षा पेपर लीक विरोध में शामिल छात्रों व प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने तथा गिरफ्तार छात्रों को रिहा करने के सरकार के निर्णय का स्वागत किया है...
Patna : बिहार अभियंत्रण सेवा संघ (BESA) के पूर्व महासचिव एवं इंडियन इंजीनियर्स फेडरेशन (पूर्व) के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने नीट यूजी (NEET-UG) परीक्षा पेपर लीक विरोध में शामिल छात्रों व प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने तथा गिरफ्तार छात्रों को रिहा करने के सरकार के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने इस फैसले को लोकतंत्र की आत्मा को सुकून देने वाला और जनहित में उठाया गया कदम बताया।
दमनकारी नीतियों पर प्रहार, छात्रों में बढ़ेगा सुरक्षा का भाव
डॉ. चौधरी ने कहा कि सरकार के इस कदम से आम जनता और छात्रों का सरकार तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था में भरोसा और मजबूत होगा। इससे छात्रों के मन में भविष्य को लेकर सुरक्षा की भावना पैदा होगी। उन्होंने कहा कि यह फैसला सत्ता में बैठी अदृश्य शक्तियों की दमनकारी नीति पर करारा प्रहार है, जिसकी गूंज भविष्य में लंबे समय तक सुनाई देगी।
बिहार के अभियंताओं के खिलाफ दमनकारी नीति पर जताई गहरी नाराजगी
इसके साथ ही डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने राज्य में अभियंताओं (Engineers) के खिलाफ अपनाई जा रही दमनकारी नीति पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए इस पर अविलंब रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिन अभियंताओं की मेहनत के बल पर बिहार के विकास का डंका देश-दुनिया में बज रहा है, उन्हीं को प्रताड़ित किया जा रहा है, जो किसी भी दृष्टिकोण से राज्य हित में नहीं है।
बेवजह निलंबन, जबरिया रिटायरमेंट की धमकी और जांचों से त्रस्त हैं अभियंता
उन्होंने आरोप लगाया कि बात-बात पर अभियंताओं को निलंबित कर देना, अभद्र भाषा का प्रयोग, जबरिया रिटायरमेंट की धमकी देना और विभागीय कार्रवाई को वर्षों तक लटकाए रखना आजकल अभियंताओं की नियति बन गया है। लगातार भय और मानसिक तनाव के साए में जीने के कारण राज्य के अभियंता तरह-तरह की गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। भयभीत प्रतिभा से बिहार के विकास की अपेक्षा रखना बेमानी है।
वित्तीय अनियमितता छोड़ बाकी दंडात्मक कार्रवाई निरस्त करने की मांग
डॉ. चौधरी ने सरकार को सलाह दी कि अगर बिहार को विकसित राज्यों की श्रेणी में खड़ा करना है, तो वित्तीय अनियमितता के मामलों को छोड़कर अभियंताओं के विरुद्ध चलाई जा रही सभी दंडात्मक कार्रवाइयों को तुरंत निरस्त किया जाए। उन्होंने मांग की कि अभियंताओं का बेवजह उत्पीड़न बंद किया जाए और उनके जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि वे बिहार के नवनिर्माण और विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।