शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के कलमबंद आंदोलन का असर, विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों में कामकाज ठप
Bihar news : बिहार के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के शिक्षकेत्तर कर्मचारियों द्वारा अपनी लंबित मांगों के समाधान के लिए चलाए जा रहे कलमबंद आंदोलन के दूसरे दिन गुरुवार को विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों का कामकाज पूरी तरह ठप रहा। राज्य के सभी परम्परागत विश्वविद्यालयों तथा लगभग 250 अंगीभूत महाविद्यालयों के करीब 33,000 शिक्षकेत्तर कर्मचारी आज दूसरे दिन भी आंदोलन पर डटे रहे।
महासंघ के पदाधिकारियों अध्यच्छ वेंकटेश कुमार महामंत्री रोहित कुमार,विनोद कुमार,दीपक कुमार त्रिपुरारी प्रसाद एवं संजीव कुमार ने बताया कि कर्मचारियों की विभिन्न मांगें—जैसे वेतन विसंगति का समाधान, पदोन्नति, दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों एवं संविदा कर्मी का स्थायीकरण एवं अन्य सुविधाएं—लंबे समय से लंबित हैं। कई बार आग्रह के बावजूद अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है, जिससे कर्मचारियों में गहरी नाराजगी है।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों में नवस्थापित डिग्री कॉलेजों में महाविद्यालयों से कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति किया जा रहा है, जबकि संबंधित महाविद्यालयों में पहले से ही स्वीकृत पदों की तुलना में कर्मचारियों की संख्या काफी कम है। इन परिस्थित्यों में महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय में प्रशासनिक एवं शैच्छनिक कार्य संचालन में बाधा उत्पन्न होगी ।महासंघ ने सरकार एवं विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि या तो नियमित बहाली की जाए अथवा अनुभवी सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अनुबंध पर नियुक्त किया जाए।
आंदोलन के आगामी कार्यक्रम के तहत 20.05.2026 को विश्वविद्यालय मुख्यालय पर कुलपति के समक्ष व्यापक धरना एवं प्रदर्शन किया जाएगा। जुलाई 2026 में बिहार विधानमंडल के समक्ष विशाल धरना आयोजित किया जाएगा, जिसमें राज्यभर के कर्मचारी भाग लेंगे। वहीं अगस्त 2026 में आंदोलन को और तेज करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की जाएगी।
महासंघ ने सरकार से मांग की है कि वह शीघ्र सकारात्मक कदम उठाए, ताकि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान हो सके। सभी शिक्षकेत्तर कर्मचारियों से अपील की जाती है कि वे एकजुट होकर इस आंदोलन को सफल बनाएं, ताकि अपनी जायज मांगों को प्राप्त किया जा सके।