बिहार में 'शराबबंदी' की हकीकत : विकास भवन के डस्टबिन में मिलीं खाली शराब की बोतलें

शराबबंदी वाले बिहार में हाई-प्रोफाइल 'विकास भवन' में शराब मिलने से मचा हड़कंप; सुरक्षा और कानून के दावों पर उठे गंभीर सवाल...

बिहार में 'शराबबंदी' की हकीकत : विकास भवन के डस्टबिन में मिल
विकास भवन के डस्टबिन में मिलीं खाली शराब की बोतलें- फोटो : रंजन कुमार

Patna : बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद राजधानी पटना से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सोमवार को सचिवालय के 'विकास भवन' परिसर में शराब की खाली बोतलें और टेट्रा पैक मिलने से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। जिस स्थान से पूरे राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था नियंत्रित होती है, वहां के कूड़ेदान में शराब की बोतलें मिलना सरकार के शराबबंदी के दावों पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा रहा है।


जानकारी के मुताबिक, विकास भवन में रखे डस्टबिन में शराब की खाली बोतलें और खाली टेट्रा पैक देखे गए। यह क्षेत्र सचिवालय का बेहद संवेदनशील हिस्सा माना जाता है, जहां विभिन्न विभागों के वरीय अधिकारी और कर्मचारी बैठते हैं। सरकारी परिसर के भीतर इस तरह शराब के अवशेष मिलना न केवल सुरक्षा में बड़ी चूक है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि प्रतिबंधित होने के बावजूद शराब की पहुंच सत्ता के गलियारों तक बनी हुई है।

सचिवालय से शराब मिलने की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई, जिससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। गौरतलब है कि सचिवालय परिसर में प्रवेश के लिए कड़ी सुरक्षा जांच होती है और हर आने-जाने वाले पर नजर रखी जाती है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर हाई-सिक्योरिटी जोन के भीतर ये बोतलें कैसे पहुंचीं? क्या किसी कर्मचारी या अधिकारी की मिलीभगत से यह संभव हुआ, या सुरक्षा व्यवस्था में कोई बड़ा छेद है, इसकी जांच अब एक चुनौती बन गई है।


घटना के बाद विपक्षी दलों और स्थानीय नागरिकों ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। लोगों का कहना है कि जब सचिवालय जैसे 'पावर सेंटर' में शराब की बोतलें मिल सकती हैं, तो राज्य के अन्य हिस्सों में शराबबंदी की क्या स्थिति होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। सरकार द्वारा बार-बार शराबबंदी को सफल बताने के दावों के बीच यह घटना प्रशासन के लिए बड़ी शर्मिंदगी का सबब बनी हुई है। फिलहाल इस मामले में कोई भी जिम्मेदार अधिकारी कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से बच रहा है।


प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए आंतरिक जांच के आदेश दिए जा सकते हैं। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि कूड़ेदान में ये बोतलें किसने और कब फेंकीं। यह पहली बार नहीं है जब बिहार के महत्वपूर्ण सरकारी परिसरों से शराब की बोतलें मिली हैं, लेकिन विकास भवन जैसे केंद्र से ऐसी बरामदगी ने एक बार फिर 'इंट्री माफिया' और व्यवस्था के बीच के संदिग्ध रिश्तों की ओर इशारा कर दिया है।


रंजन की रिपोर्ट