पटना, लखीसराय और पूर्णिया में तीन फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट गठित , पटना हाई कोर्ट ने अम्बेडकर विश्वविद्यालय पर की कड़ी टिप्पणी

Patna High Court
Patna High Court - फोटो : news4nation

Patna High Court :  पटना हाईकोर्ट ने पटना,लखीसराय  और पूर्णिया में जिला व अपर सत्र न्यायालय स्तर के तीन विशेष कोर्ट (फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट) गठित  करने का निर्णय लिया है।  ये कोर्ट सार्वजनिक परीक्षा [ prevention of unfair means] एकट,2024 के अंतर्गत अपराधों का ट्रायल करेंगे।ये कोर्ट इन मामलों की दिन प्रतिदिन  के आधार  पर सुनवाई  करेंगे। ये कोर्ट तीन माह में चार्जशीट दाखिल करने के बाद  ट्रायल की सुनवाई पूरी  कर अपना निर्णय  दे देंगे।

गौरव सिंह, सुश्री  सीमा भारती व  ठाकुर अमन कुमार क्रमशः पटना,लखीसराय और पूर्णिया के इन स्पेशल कोर्ट की अध्यक्षता के लिए नामित किए गए हैं। बिहार सरकार से अनुरोध किया गया हैं कि इन कोर्ट के सम्बन्ध में  में उपरोक्त अध्यक्षता करने न्यायिक पदाधिकारीगण के नाम की अधिसूचना जारी करें।


विश्वविद्यालय के कुलपति एवं रजिस्ट्रार के विरुद्ध कड़ी टिप्पणी

पटना  हाईकोर्ट ने बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कोर्ट के अंतरिम आदेश की कथित अवहेलना को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विश्वविद्यालय के कुलपति एवं रजिस्ट्रार के विरुद्ध कड़ी टिप्पणी की है।जस्टिस हरीश कुमार की एकलपीठ ने प्रथम दृष्टया माना कि विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने कोर्ट के आदेश की जानबूझकर अवहेलना की है।  उनका आचरण अवमानना की श्रेणी में आता है।


ये  मामला रवि चंद्रन एवं डॉ. राजेश कुमार चौधरी  द्वारा दायर दो अलग अलग याचिकाओं से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं की  ओर से  वरीय अधिवक्ता आनंद कुमार ओझा ने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए अंतरिम संरक्षण के बावजूद विश्वविद्यालय ने डॉ. राजेश कुमार चौधरी का नाम नवीनीकृत अतिथि शिक्षकों  की सूची से हटा दिया तथा उनकी जगह दूसरे व्यक्ति का नाम शामिल कर दिया। 


बाद में उन्हें केवल "वेटिंग फॉर पोस्टिंग" सूची में रखा गया।सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से अधिवक्ता ने  जवाब दायर   करने के लिए समय की मांग की। इस पर कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध अभिलेखों से प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने न्यायालय के आदेश का जानबूझकर उल्लंघन किया है।


हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को दो सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा एवं कारण बताओ नोटिस का उत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया है  कि क्यों नहीं  उनके विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई शुरू  की जाए ।मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त, 2026 को फिर होगी।