Sitamarhi News: नेपाल सीमा पर यूरिया और डीएपी की तस्करी, एक्शन के मूड में प्रशासन, दो दुकानों का लाइसेंस किया रद्द, 7 को किया निलंबित
बिहार के सीतामढ़ी जिले में नेपाल बॉर्डर के पास यूरिया और डीएपी की तस्करी जोरों पर है। प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए दो दुकानों के लाइसेंस रद्द और सात के निलंबित कर दिए हैं।

Sitamarhi News: बिहार का सीतामढ़ी जिला नेपाल सीमा से सटा हुआ है, जिसके कारण यहां से नेपाल में बड़े पैमाने पर यूरिया और डीएपी खाद की तस्करी की जाती है। बॉर्डर इलाके के कई बड़े तस्कर इस धंधे में शामिल हैं, और यह उनकी मुख्य कमाई का जरिया बन चुका है।हालांकि खाद वितरण पर कड़े नियम लागू हैं और प्रशासन की छापेमारी जारी है, लेकिन फिर भी सीजन के दौरान तस्कर बड़ी मात्रा में यूरिया की तस्करी करने में सफल हो जाते हैं। यह मुद्दा इतना गंभीर है कि हाल ही में बिहार विधानसभा में भी इस पर चर्चा हुई थी।
विधानसभा में उठा मुद्दा, विभाग ने तस्करी स्वीकार की
सीतामढ़ी जिले के बाजपट्टी विधायक मुकेश कुमार यादव ने विधानसभा में खाद तस्करी का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया किया था किक्या किसानों को यूरिया सरकारी दर (₹266.50) की जगह ₹350-₹400 प्रति बैग खरीदना पड़ रहा है?क्या थोक विक्रेता और विभागीय अधिकारी मिलीभगत कर नेपाल में खाद भेज रहे हैं?अगर यह सही है, तो प्रशासन ने क्या कार्रवाई की?
विभाग की स्वीकृति और कार्रवाई
विभागीय मंत्री ने लिखित जवाब में स्वीकार किया कि जिले में खाद वितरण में गड़बड़ी हुई है। इस कारण:दो दुकानों के लाइसेंस रद्द किए गए। इसके अलावा सात दुकानों के लाइसेंस निलंबित किए गए। इससे साफ जाहिर होता है कि तस्करी और कालाबाजारी को रोकने के लिए प्रशासन को अब और सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
सीतामढ़ी में उर्वरक आपूर्ति की स्थिति
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सीतामढ़ी जिले में:
उर्वरक प्रकार आवश्यकता (एमटी) आपूर्ति (एमटी)
यूरिया 29,307 26,457
डीएपी 6,370 9,092
एनपीके 9,900 7,346
एमओपी 2,000 3,616
मंत्री ने स्पष्ट किया कि जिले में खाद की कोई कमी नहीं है। लेकिन इसके बावजूद किसानों को ऊंची कीमत पर यूरिया खरीदने की शिकायतें मिल रही हैं, जो तस्करी और कालाबाजारी की ओर इशारा करती हैं।
उर्वरक तस्करी और अधिक कीमत पर बिक्री का मुद्दा
सीतामढ़ी जिले में कुल 1010 उर्वरक विक्रेता हैं, जिनमें 32 थोक विक्रेता और 978 खुदरा विक्रेता शामिल हैं।सरकार ने 359 दुकानों का औचक निरीक्षण किया, जिसमें कई गड़बड़ियां सामने आईं। बॉर्डर पर एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) भी तस्करों पर नजर रख रही है, लेकिन इसके बावजूद यूरिया तस्करी बंद नहीं हो पा रही है।
किसानों को ऊंचे दामों पर यूरिया क्यों मिल रही है?
थोक विक्रेता खाद को ब्लैक मार्केट में भेजते हैं।बॉर्डर के पास के व्यापारी नेपाल में ऊंचे दामों पर बेचने के लिए स्टॉक जमा कर लेते हैं।मांग अधिक होने पर कीमतें बढ़ा दी जाती हैं।
प्रशासन ने क्या कदम उठाए?
यूरिया तस्करी और खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए प्रशासन ने निगरानी टीम गठित की है।औचक निरीक्षण और छापेमारी जारी है।तस्करी में शामिल दुकानों के लाइसेंस रद्द किए जा रहे हैं।बॉर्डर पर एसएसबी को सतर्क किया गया है।