सीजेएम और डीएलएसए सचिव ने मंडल कारा का किया औचक निरीक्षण, पात्र बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने पर दिया जोर

सीजेएम और डीएलएसए सचिव ने मंडल कारा का किया औचक निरीक्षण, पा
सीजेएम और डीएलएसए सचिव ने मंडल कारा का किया औचक निरीक्षण- फोटो : विनय कुमार मिश्रा

Supaul : प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) राजेश कुमार बच्चन के निर्देशानुसार मंगलवार को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) राम चंद्र प्रसाद एवं डीएलएसए के सचिव अमित गौरव ने सुपौल मंडल कारा का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने कारा की विभिन्न प्रबंधकीय व्यवस्थाओं का जायजा लेने के साथ ही बंदियों से संवाद स्थापित कर उन्हें मिल रही विधिक एवं चिकित्सकीय सुविधाओं की विस्तृत जानकारी ली।


निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने अलग-अलग बंदियों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत कर उनके मुकदमों की वर्तमान स्थिति, न्यायालयीन कार्यवाही और विधिक सहायता की उपलब्धता की समीक्षा की। विशेष रूप से उन बंदियों से संवाद किया गया जो आर्थिक तंगी के कारण निजी अधिवक्ता नियुक्त करने में असमर्थ हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिया कि कोई भी पात्र बंदी केवल आर्थिक असमर्थता के कारण न्याय से वंचित नहीं रहना चाहिए और उन्हें प्राधिकार के माध्यम से पूर्ण कानूनी सहायता मिलनी चाहिए।


अधिकारियों ने मंडल कारा के रसोईघर (जेल किचन) का भी औचक जायजा लिया, जहाँ बंदियों के लिए तैयार हो रहे भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई, स्वच्छता और वितरण व्यवस्था की जांच की गई। उन्होंने संबंधित कारा पदाधिकारियों को भोजन की पौष्टिकता एवं उच्च गुणवत्ता बनाए रखने तथा रसोईघर परिसर में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने के कड़े निर्देश दिए।


इसके बाद अधिकारियों ने कारा अस्पताल का निरीक्षण कर वहाँ उपलब्ध चिकित्सकीय सुविधाओं, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता, अस्पताल की साफ-सफाई और स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत जानी। उन्होंने जरूरतमंद बंदियों को समय पर उचित चिकित्सा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही मंडल कारा में पेयजल, साफ-सफाई और बंदियों के कल्याण से जुड़े अन्य मूलभूत प्रबंधों की भी समीक्षा की गई।


डीएलएसए सचिव अमित गौरव ने इस बात पर विशेष बल दिया कि सभी पात्र बंदियों को समयबद्ध और प्रभावी विधिक सहायता मिले ताकि न्यायिक प्रक्रिया में किसी को असुविधा न हो। यह निरीक्षण प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के मार्गदर्शन में बंदियों के अधिकारों, कल्याण और न्याय तक उनकी सुगम पहुंच सुनिश्चित करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा चलाए जा रहे निरंतर अभियानों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।


विनय कुमार मिश्रा की रिपोर्ट