जनसुराज का सरकार पर तीखा हमला: 6 महीने में हर मोर्चे पर विफल रही NDA, सुपौल में भ्रष्टाचार और परिवारवाद का बोलबाला

Bihar News : पीके की जनसुराज पार्टी ने एकबार बिहार की एनडीए सरकार पर हमला बोला है। जनसुराज ने कहा है कि बिहार की एनडीए सरकार के 6 माह पूरे हो चुके है, लेकिन इस दौरान सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है.....

जनसुराज का सरकार पर तीखा हमला: 6 महीने में हर मोर्चे पर विफल
जनसुराज का सरकार पर तीखा हमला- फोटो : विनय कुमार मिश्रा

Supaul : जनसुराज पार्टी ने बुधवार को एक प्रेस वार्ता आयोजित कर बिहार की एनडीए सरकार पर चौतरफा हमला बोला है। राज्य में सरकार के 6 महीने पूरे होने पर उसके चुनावी वादों और जमीनी हकीकत की समीक्षा करते हुए जनसुराज के जिलाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने सरकार को हर मोर्चे पर पूरी तरह विफल बताया। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने अपने कार्यकाल में सिर्फ यह साबित किया है कि एनडीए परिवारवाद का सबसे बड़ा संरक्षक है, जिसके कारण शीर्ष नेताओं ने अपने-अपने बेटों को कैबिनेट में जगह दिलाई है।


रोजगार के वादे को बताया 'हवा-हवाई'

चुनावी वादों का जिक्र करते हुए जिलाध्यक्ष ने कहा कि सरकार ने 5 वर्षों में एक करोड़ लोगों को रोजगार देने की घोषणा की थी, जिसके हिसाब से शुरुआती 6 महीनों में 10 लाख बेरोजगारों को नौकरी मिलनी चाहिए थी। लेकिन हकीकत यह है कि इस अवधि में एक भी बेरोजगार को रोजगार नहीं मिला, बल्कि हक मांगने वाले युवाओं पर लाठियां बरसाई गईं। सुपौल जिले की बदहाली का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सात निश्चय योजना के तहत जिले में खोले गए 32 डोमेन स्किल सेंटरों में से 31 बंद हो चुके हैं और केवाईपी केंद्र भी बदहाल पड़े हैं।


अतिक्रमण के नाम पर गरीबों को किया बेघर

महिला उत्थान और आवास योजना पर सरकार को घेरते हुए जनसुराज नेता ने कहा कि चुनाव के समय महिलाओं को आर्थिक मदद का झांसा देकर वोट तो ले लिए गए, लेकिन रोजगार के लिए दो-दो लाख रुपये देने की बात हवा में उड़ गई। इसके अलावा, राज्य के 94 लाख गरीब परिवारों को घर देने का सपना दिखाने वाली सरकार ने सुपौल जिले में पिछले छह महीनों के भीतर अतिक्रमण हटाने के नाम पर हजारों गरीबों के आशियाने बुलडोजर से ध्वस्त कर दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले में बिना भारी कमीशन लिए कोई भी आवास योजना स्वीकृत नहीं की जा रही है।


मनरेगा में 50 फीसदी कमीशनखोरी का आरोप

जिलाध्यक्ष ने सुपौल में मनरेगा योजना की जमीनी हकीकत उजागर करते हुए कहा कि जिले में वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार कुल 8,36,401 जॉब कार्ड धारी हैं। लेकिन प्रशासनिक उदासीनता और भ्रष्टाचार के कारण इनमें से मात्र 385 लोगों को ही 100 दिनों का रोजगार मिल सका है, जिसमें 142 दिव्यांग शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा में सिर्फ कागजी खानापूर्ति कर करोड़ों रुपये की फर्जी निकासी की जा रही है, जिसमें भ्रष्ट अधिकारियों का हिस्सा 50-50 प्रतिशत तक बंधा हुआ है।


कानून व्यवस्था ध्वस्त, नशे की गिरफ्त में युवा पीढ़ी

प्रेस वार्ता के दौरान सिंह ने बिहार की कानून व्यवस्था और बढ़ते अपराध पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जिले में पिछले छह महीनों के भीतर दर्जनों लोगों की निर्मम हत्याएं हो चुकी हैं, लेकिन पुलिस इसे केवल जमीनी विवाद या प्रेम प्रसंग का रूप देकर पल्ला झाड़ लेती है। इसके साथ ही पूरा जिला इस वक्त सूखे नशे की भीषण गिरफ्त में है, जिससे 80 प्रतिशत युवा बर्बाद हो रहे हैं। इस मौके पर क्षेत्रीय प्रभारी इंद्रदेव साह, प्रवक्ता रीति झा, युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष मो. मजहर आलम और महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष अनुराधा पासवान सहित कई मुख्य नेता उपस्थित थे।


विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट