सुपौल स्पेशल लोक अदालत: चेक बाउंस मामले का हुआ निपटारा, 30 हजार रुपये में बनी सहमति

सुपौल स्पेशल लोक अदालत: चेक बाउंस मामले का हुआ निपटारा, 30 ह
सुपौल में स्पेशल लोक अदालत का आयोजन- फोटो : विनय कुमार मिश्रा

Supaul : राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) सुपौल के अध्यक्ष सह प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनंत सिंह के मार्गदर्शन में शनिवार को सुपौल न्याय मंडल में वर्ष की प्रथम स्पेशल लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) की धारा 138 से जुड़े चेक बाउंस के मामलों का आपसी सुलह और समझौते के आधार पर त्वरित, सरल एवं नि:शुल्क निपटारा करना था।


बेंच का गठन और सुनवाई

इस विशेष लोक अदालत को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए एक विशेष बेंच का गठन किया गया था। इस बेंच में न्यायिक पदाधिकारी श्वेताभ सैंडिल्या और गैर-न्यायिक सदस्य गणपत चौधरी ने मामलों की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान दोनों सदस्यों ने पक्षकारों को समझा-बुझाकर और उन्हें कानूनी फायदे बताकर आपसी सहमति से विवाद को हमेशा के लिए समाप्त करने के लिए प्रेरित किया।


94 मामले चिन्हित, एक का हुआ निष्पादन

स्पेशल लोक अदालत में सुनवाई के लिए एन.आई. एक्ट की धारा 138 से संबंधित कुल 94 मामलों को चिन्हित किया गया था। प्रक्रिया के दौरान पक्षकारों के बीच आपसी सहमति बनने पर एक मामले का सफलतापूर्वक निष्पादन किया गया। इस चेक बाउंस मामले में दोनों पक्षों के बीच 30,000 रुपये की समझौता राशि पर अंतिम सहमति बनी, जिसके बाद केस का विधिक रूप से हमेशा के लिए निस्तारण कर दिया गया।


समय और धन की हुई बचत

लोक अदालत के दौरान न्यायिक पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं और पक्षकारों की भारी और सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। अधिकारियों ने बताया कि लोक अदालत का मुख्य लक्ष्य न्यायालयों में वर्षों से लंबित मामलों का शीघ्र और सौहार्दपूर्ण समाधान करना है। विशेष रूप से चेक बाउंस जैसे मामलों में आपसी समझौते से विवाद समाप्त होने पर पक्षकारों के समय और धन की बचत होती है, साथ ही उन्हें अनावश्यक मानसिक तनाव और मुकदमेबाजी से भी बड़ी राहत मिलती है।


विवादों के त्वरित समाधान की अपील

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि लोक अदालत की पूरी प्रक्रिया बेहद सरल, पूरी तरह नि:शुल्क और जनहितकारी है। इसमें किसी भी पक्ष पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ता। प्राधिकरण ने आम नागरिकों से अपील की है कि जिन मामलों का समाधान आपसी सुलह से संभव है, वे लोक अदालत का लाभ जरूर उठाएं। इससे न केवल विवाद का त्वरित समाधान होता है, बल्कि न्यायालयों पर लंबित मुकदमों का भार भी कम होता है।


विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट