सरकार की टेढ़ी नजर: आपकी रील और गेमिंग पर लग सकता है 'डेटा का ग्रहण'! परदे के पीछे चल रही है खास तैयारी

भारत में अब सस्ता इंटरनेट बीते दिनों की बात हो सकती है; सरकार मोबाइल डेटा के इस्तेमाल पर अलग से टैक्स लगाने के विकल्प पर विचार कर रही है।

सरकार की टेढ़ी नजर: आपकी रील और गेमिंग पर लग सकता है 'डेटा का

N4N Desk - भारत में मोबाइल इंटरनेट इस्तेमाल करना आने वाले समय में महंगा हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार मोबाइल डेटा की खपत पर एक नया टैक्स लगाने की संभावनाओं को तलाश रही है। हाल ही में टेलीकॉम सेक्टर की एक रिव्यू मीटिंग के दौरान यह मुद्दा उठा, जिसके बाद दूरसंचार विभाग (DoT) को इस पर विस्तृत स्टडी करने का जिम्मा सौंपा गया है। विभाग को यह जांचने के लिए कहा गया है कि क्या डेटा इस्तेमाल पर टैक्स लगाना व्यावहारिक है और यदि हाँ, तो इसका क्रियान्वयन मॉडल क्या होगा।

₹1 प्रति GB टैक्स का फॉर्मूला और ₹22,900 करोड़ की कमाई

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार जिस विकल्प पर विचार कर रही है, उसके तहत ₹1 प्रति GB डेटा पर टैक्स लगाया जा सकता है। यदि यह प्रस्ताव धरातल पर उतरता है, तो हर बार डेटा खपत के साथ यूजर के बिल या बैलेंस में यह अतिरिक्त चार्ज जुड़ जाएगा। अनुमान है कि इस छोटे दिखने वाले टैक्स से सरकार को प्रति वर्ष लगभग ₹22,900 करोड़ का भारी-भरकम राजस्व प्राप्त हो सकता है। हालांकि, दूरसंचार विभाग की रिपोर्ट आने के बाद ही इस पर कोई अंतिम मुहर लगेगी।

डिजिटल इंडिया की रफ्तार पर ब्रेक का डर

भारत वर्तमान में दुनिया के उन देशों में शुमार है जहाँ मोबाइल डेटा सबसे सस्ता है। इसी सस्ते इंटरनेट की बदौलत देश में वीडियो स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और रील देखने का चलन तेजी से बढ़ा है। जानकारों का मानना है कि नया टैक्स लगने से डिजिटल इंडिया की रफ्तार धीमी पड़ सकती है, खासकर उन ग्रामीण इलाकों में जहाँ डेटा की खपत आर्थिक संवेदनशीलता से जुड़ी है। वर्तमान में यूजर्स पहले से ही मोबाइल रिचार्ज और पोस्टपेड बिल पर 18% GST का भुगतान कर रहे हैं, ऐसे में डेटा पर अलग से टैक्स बोझ बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।

सोशल मीडिया पर चर्चा तेजआधिकारिक बयान का इंतजार

भले ही सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान (Official Statement) जारी नहीं किया गया है, लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे रेडिट और ट्विटर पर सूत्रों के हवाले से यह खबर चर्चा का विषय बनी हुई है। फिलहाल, पूरी गेंद दूरसंचार विभाग के पाले में है, जो इसके फायदे और नुकसान का विश्लेषण कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। तब तक के लिए यूजर्स को केवल कयासों और संभावित खर्चों के गणित के साथ ही संतोष करना होगा।

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