Crime News: नीले ड्रम में लाश, 126 पेशियां और 22 गवाह… आज खुलेगा मेरठ के नीला ड्रम केस का राज!
Crime News: मेरठ के बहुचर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड, जिसे ‘नीला ड्रम केस’ के नाम से जाना जाता है, में आज अदालत का फैसला आने वाला है। ...
Crime News: मेरठ के बहुचर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड, जिसे ‘नीला ड्रम केस’ के नाम से जाना जाता है, में आज अदालत का फैसला आने वाला है। करीब 13 महीने चली सुनवाई, 126 पेशियों और 22 से अधिक गवाहों के बयान के बाद जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत मामले में अपना निर्णय सुनाएगी। केस में सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला आरोपी हैं। अभियोजन ने दोनों के लिए मौत की सजा की मांग की है, जबकि बचाव पक्ष ने हत्या का कोई चश्मदीद गवाह नहीं होने का हवाला देते हुए राहत की मांग की है।
नीले ड्रम से खुला था खौफनाक राज
मार्च 2025 में यह मामला उस वक्त सुर्खियों में आया, जब सौरभ राजपूत का शव घर में रखे एक बड़े नीले प्लास्टिक ड्रम से बरामद हुआ। पुलिस ने मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार किया और 19 मार्च को जेल भेज दिया। जुलाई 2025 में जिला अदालत में ट्रायल शुरू हुआ। इसके बाद लगातार गवाही, वैज्ञानिक साक्ष्यों और कानूनी दलीलों का दौर चला।
चाकू, रेजर, सीमेंट और ड्रम की खरीद का दावा
अभियोजन के मुताबिक वारदात की तैयारी पहले से की गई थी। चाकू, रेजर, सीमेंट, रेत और बड़ा ड्रम खरीदे जाने की बात अदालत के सामने रखी गई। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से मिले खून के निशान समेत अन्य साक्ष्यों के बारे में गवाही दी।
ड्रम काटने वाले व्यक्ति ने अदालत को बताया कि ड्रम का ढक्कन नहीं खुलने पर उसे काटा गया था। उसके अंदर सीमेंट में शव के अवशेष मिलने की बात सामने आई। रेजर और चाकू मिलने का भी अभियोजन ने उल्लेख किया। पोस्टमार्टम डॉक्टर ने धारदार हथियार से चोट के निशानों की जानकारी दी।
मोबाइल लोकेशन से शिमला होटल तक कड़ियां
अदालत में मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल और लोकेशन डेटा भी पेश किया गया। शिमला के एक होटल मैनेजर ने मुस्कान और साहिल के वहां ठहरने तथा पहचान के लिए आधार कार्ड देने की बात कही। एक कैब ड्राइवर ने भी दोनों को यात्रा कराने और बाद में खबरों में तस्वीर देखकर पहचानने की गवाही दी।
परिवार के सदस्यों समेत कई गवाहों के बयान के आधार पर अभियोजन ने अपना पक्ष रखा और दोनों आरोपियों के लिए मौत की सजा की मांग की। वहीं बचाव पक्ष ने कहा कि हत्या का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है और अदालत से राहत मांगी।अब निगाहें जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत के फैसले पर टिकी हैं। अदालत उपलब्ध गवाहियों, वैज्ञानिक साक्ष्यों, दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर अपना निर्णय सुनाएगी।