Bihar News : 'आंदोलन भी संवाद का एक तरीका, Gen-Z की चिंताएं सही' — शिक्षा व्यवस्था पर RSS प्रमुख मोहन भागवत ने दिया बड़ा बयान
Bihar News : संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा की नई पीढ़ी यानी Gen-Z की शिकायतें और चिंताएं बिल्कुल सही हैं। भारत की शिक्षा व्यवस्था में अभी बहुत कुछ करने और सुधारने की आवश्यकता है।
New Delhi : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने युवाओं और छात्रों से संवाद करते हुए शिक्षा व्यवस्था, छात्र आंदोलनों और नई पीढ़ी (Gen-Z) की सोच पर खुलकर अपने विचार रखे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन भी संवाद का ही एक तरीका है। जब बातचीत के जरिए समाधान नहीं निकलता या बात नहीं सुनी जाती, तब लोग आंदोलन का रास्ता अपनाते हैं। उन्होंने जोर दिया कि संवाद से ही हर समस्या का समाधान संभव है।
Gen-Z की शिकायतें जायज, शिक्षा में बड़े सुधार की जरूरत
संघ प्रमुख ने देश की वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर बात करते हुए कहा कि नई पीढ़ी यानी Gen-Z की शिकायतें और चिंताएं बिल्कुल सही हैं। भारत की शिक्षा व्यवस्था में अभी बहुत कुछ करने और सुधारने की आवश्यकता है। पुरानी और नई पीढ़ी के अंतर पर उन्होंने कहा कि पहले के युवा बड़ों की बात आसानी से मान लेते थे, लेकिन आज की पीढ़ी सवाल पूछती है और तार्किक जवाब चाहती है। अगर संबंध हैं, तो उनके सवालों का जवाब देना ही पड़ेगा।
संविधान के दायरे में हो आंदोलन, भारतीय परंपरा में 'शास्त्रार्थ' का महत्व
भागवत ने कहा कि वे युवाओं को आंदोलन करने से मना नहीं करेंगे, लेकिन यह कैसे और क्या करना है, इसका तरीका संविधान में स्पष्ट रूप से लिखा हुआ है। उन्होंने अंग्रेजी शब्द 'डिबेट' की तुलना भारतीय परंपरा के 'शास्त्रार्थ' से करते हुए कहा कि लोकतंत्र में यह प्रक्रिया बेहद जरूरी है। समाज को यह समझना होगा कि अगर युवा आवाज उठा रहे हैं या 'चिल्ला रहे हैं', तो उसके पीछे अवश्य ही कोई ठोस वजह है।
शिक्षा व्यापार नहीं, बुनियादी सुविधाएं और शिक्षक प्रशिक्षण जरूरी
देश के स्कूलों में शौचालय और पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा कोई कमर्शियल बिजनेस नहीं, बल्कि जीवन की अनिवार्य आवश्यकता है। शिक्षा का ढांचा ऐसा होना चाहिए जो सभी को सुलभ हो। उन्होंने शिक्षकों के गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य अगली पीढ़ी का निर्माण करना है, न कि स्कूल चलाकर मुनाफा कमाना।
GDP का 6% शिक्षा पर खर्च करने का समर्थन, समाज की सहभागिता पर जोर
शिक्षा बजट के मुद्दे पर संघ प्रमुख ने दशकों से चली आ रही मांग का समर्थन करते हुए कहा कि शिक्षा पर देश की जीडीपी (GDP) का 6 प्रतिशत बजट आवंटित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरी शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी केवल सरकार पर नहीं छोड़ी जा सकती। उन्होंने कई गांवों और शहरों का उदाहरण देते हुए कहा कि समाज और कार्यकर्ताओं को भी आगे आकर स्कूलों की स्थिति सुधारने और संसाधन जुटाने में सहयोग करना होगा।