Puja rules:नवरात्रि में पूरा फल भोग लगाएं या फिर काटकर,शास्त्र क्या कहता है,प्रेमानंद महाराज ने सब कुछ बताया..ऐसे देवता होते हैं नाराज
Puja rules:Puja rules:सनातन धर्म में भगवान की पूजा के दौरान नेवैद्य या भोग अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है। कई बार अनजाने में भोग अर्पित करते समय कुछ गलतियाँ हो जाती हैं, जिससे भोग का फल व्यर्थ हो सकता है।

Puja rules:सनातन धर्म में भगवान की पूजा के दौरान नेवैद्य या भोग अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है। भक्त अपने आराध्य को उनके पसंदीदा भोग अर्पित करके उन्हें प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। विशेषकर व्रत, तीज-त्योहारों के अवसर पर भगवान को विशेष व्यंजनों का भोग अर्पित किया जाता है। हालांकि, कई लोग भोग अर्पित करने के महत्व और इसके नियमों को पूरी तरह से नहीं समझते हैं, इसलिए यह आवश्यक है कि भगवान को अर्पित किए जाने वाले भोग के सही नियमों को जाना जाए। माना जाता है कि इन नियमों का पालन करने से ही भोग स्वीकार्य स्थिति में आता है और भगवान प्रसन्न होते हैं। कई बार अनजाने में भोग अर्पित करते समय कुछ गलतियाँ हो जाती हैं, जिससे भोग का फल व्यर्थ हो सकता है।
प्रेमानंद महाराज के अनुसार कुछ फल बीज और गुठली युक्त जैसे सेव, संतरा तरबूज, पपीता, आम होते हैं। अक्सर लोग बिना गुठलियों और बीजों के साथ सीधे प्रभु को नैवेद्यय चढ़ा देते है। अपने सेवन के समय तो लोग इसे निकाल देते हैं लेकिन प्रभु को अर्पित करते वक्त सीधे हीं चढ़ा देते है.
प्रेमानंद महाराज के अनुसार जब हम श्री जी को इन फलों को चढ़ावें उससे पहले इसको अच्छे ढ़ंग से धो कर एक एक बीज और गुठली को निकाल कर भगवान को चढ़ाना चाहिए।
प्रेमानंद महाराज का कहना है कि अनजाने में हो रही इन गलतियों से बचना चाहिए, पूजा-पाठ और हवन के दौरान इन गलतियों से बचना चाहिए।