Literature:कागज पर उकेरी वेदना,मन के अगाध बोझ को हलका करती लेखनी, पढ़िए हृदय की मूक वेदना का आलेख

Literature:लेखनी स्याही के भौतिक भार से नहीं, वर्षों से हृदय में संचित अनकहे संताप और विचारों से बोझिल है। जो भाव जिह्वा से मुखरित नहीं हो पाते, वे कलम की नोक पर विश्राम पाते हैं।पढ़िए मंजू कुमारी की अंतरात्मा को संबल प्रदान करने की कविता' कलम'...

Manju kumari

Literature: कलम... लेखनी की गुरुता और अंतर्मन की वेदना का सजीव प्रकटीकरण हैं। यह अक्षरजननी केवल मसी-पात्र की स्याही से निर्मित नहीं, अपितु वर्षों से आच्छादित रुदन, अव्यक्त व्यथा और हृदयगत भार का वहन करती है। जिह्वा से अनिःसृत विचार इसकी नोक पर विश्राम पाते हैं। यह कागज पर केवल अक्षरों को अंकित नहीं करती, वरन हृदय को उद्वेलित कर अनुभूति को पंक्तियों में परिणत करती है। मंजू कुमारी की ...कलम.. कविता आत्मा के कष्ट का परिमार्जन करती है

कलम 

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ये जो मेरी कलम है न!

यकीन मानिए,

बहुत भारी है ये!

क्योंकि......

इसमें बूंद भर भी स्याही नहीं,

मेरे भीतर दबे हुए,

सालों दर साल का भार है।

जो दर्द जो बातें,

अक्सर जुबां तक आकर,

हर बार लौट जाती है,

वह इसी के नोक पर आकर 

तो ठहर जाती है।

मेरी कलम कागज पर शब्द नहीं लिखती,

पहले हृदय को कुदेरती है,

उद्वेलित करती है,

तब कहीं जाकर....

एक पंक्ति लिख पाती है।

इसीलिए शायद....

मेरी लिखी कविताओं में,

थोड़ा दर्द दिखाई देता है,

क्योंकि.…

ये जो मेरी कलम है न!

सिर्फ लिखती ही नहीं,

बल्कि मन के भीतर के,

दर्द और बोझ को भी कम करती है।

(मंजू कुमारी द्वारा रचित  कलम...यह काव्य पंक्तियाँ कवयित्री के अंतर्मन की गभीर संवेदना और उसकी अभिव्यक्ति के संघर्ष को परिलक्षित करती हैं। कवयित्री का कथन है कि उसकी लेखनी वस्तुतः स्याही के भौतिक भार से नहीं, अपितु वर्षों से अंतरंग में संचित पीड़ा और अनकहे विचारों के अगाध भार से बोझिल है। जिन भावों और व्यथा को मुखरित करने में जिह्वा असमर्थ रहती है, वे समस्त उद्वेग इस कलम की सूक्ष्म नोक पर आकर विश्राम पाते हैं।

मंजू कुमारी की लेखनी कागज पर केवल शब्दों का अंकन नहीं करती, अपितु सर्वप्रथम कवयित्री की चेतना को आंदोलित और हृदय को विदीर्ण करती है। इसी कारण उसकी रचनाओं में अंतर्निहित वेदना का प्रत्यक्ष आभास होता है। यह प्रक्रिया केवल काव्य सृजन की नहीं, अपितु अंतर्मन में समाहित मानसिक ताप और भावनात्मक बोझ का परिमार्जन करने का एक सशक्त माध्यम भी है।)