महिलाओं को लेकर रंग लाई नीतीश सरकार की 15 साल की मेहनत, लिंगानुपात में देश में अब टॉप के राज्यों में शामिल हुआ बिहार

महिलाओं को लेकर रंग लाई नीतीश सरकार की 15 साल की मेहनत, लिंगानुपात में देश में अब टॉप के राज्यों में शामिल हुआ बिहार

PATNA : बिहार में नीतीश सरकार द्वारा कन्याओं और युवतियों को मिले आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलने लगा है। लगातार जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के कारण लिंगानुपात (प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या) में विकसित व पड़ोसी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। बिहार में प्रति हजार पुरुषों पर बेटियों (महिलाओं) की आबादी 1090 हो गयी है। यहां हमसे अधिक लिंगानुपात सिर्फ केरल राज्य का है, जो कि देश के सबसे शिक्षित राज्य में शामिल है। केरल में एक हजार पुरुषों पर 1187 महिलाएं हैं।

हाल में जारी राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस)-5 के आंकड़ों के अनुसार विकसित राज्यों महाराष्ट्र में प्रति हजार पुरुषों पर 966, गुजरात में 965, आंध्रप्रदेश में 1045, गोवा में 1027, तेलंगाना में 1049, तमिलनाडु में 1088 है, जो बिहार से कम है। वहीं, पड़ोसी राज्यों में उत्तरप्रदेश में प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 1017, झारखंड में 1050, पश्चिम बंगाल में 1049, मध्यप्रदेश में 970 व ओडिशा में 1063 है। हालांकि, लक्ष्यद्वीप में प्रति हजार पुरुषों पर 1187, केरल में 1121 व पुडुचेरी में 1112 महिलाएं हैं।

बिहार में महिलाओं को लेकर कई योजनाएं 

बिहार में बालिकाओं के जन्म, शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा सहित विविध विषयों को लेकर कई योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। जिनमें कन्या विवाह योजना, मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना, बालिका पोशाक योजना, बालिका साइकिल योजना, सेनेटरी नैपकीन वितरण योजना लागू की गयी है। इसके साथ ही, राज्य के हरेक पंचायत में छात्राओं की शिक्षा के लिए प्लस टू (इंटर स्तरीय) विद्यालयों की स्थापना की गयी है। 

महिलाओं में नेतृत्वक्षमता के विकास और उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए पंचायत व नगर निकाय में 50 फीसदी आरक्षण दिया गया है। वहीं, राज्य में सरकारी नौकरियों में 35 फीसदी आरक्षण महिलाओं को दिया गया है। महिला सुरक्षा को लेकर विशेष महिला पुलिस बल, महिला बटालियन का गठन किया गया है। हाल के दिनों में पंचायत चुनाव में पुरुषों की तुलना में महिला प्रत्याशियों की संख्या अधिक रही हैं और कई स्थानों पर अधिक संख्या में महिलाएं ही विजेता रही हैं

  इन सभी योजनाओं का असर अब शहरी क्षेत्र के साथ ग्रामीण इलाकों में भी नजर आने लगा है। अब लोगों की बेटियों के जन्म के बाद उनकी शिक्षा, शादी, रोजगार को लेकर माता-पिता की चिंताएं कम हुई है। जिसका असर लिंगानुपात में भी नजर आने लगा है।



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