खिलौना में भ्रष्टाचार का खेल उजागर होने के 32 दिन बीते, नहीं पूरी हो सकी जांच, विलंब पर उठे सवाल, क्या बच्चों की राशि भी हो गई गबन...

खिलौना में भ्रष्टाचार का खेल उजागर होने के 32 दिन बीते, नहीं पूरी हो सकी जांच, विलंब पर उठे सवाल, क्या बच्चों की राशि भी हो गई गबन...

MOTIHARI: मोतिहारी शिक्षा विभाग की लचर व्यवस्था का आलम यह है कि मासूम बच्चों की राशि हड़पने वाले महीने भर बाद भी पकड़ से दूर हैं। आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चों को दिए जाने वाले खिलौने सहित सामग्री की गड़बड़ी की जांच 32 दिन बाद भी पूरी नहीं हो सकी। करीब एक महीने पहले इस मामले का खुलासा हुआ था।

चर्चा का विषय यह है कि आखिर 89 चिन्हित विद्यालय की जांच करने में एक माह का समय बीत जाने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। अब इसमें से भी लोगों को भ्रष्टाचार की बू आने लगी है। मीडिया में खबर आने के बाद डीपीओ द्वारा सूची में अंकित दो विद्यालयों की जांच की गयी। जांच में दोनों में किसी विद्यालय में आंगनबाड़ी केंद्र नही चलना पाया गया। वहीं एक विद्यालय में जो सामान उपलब्ध था, वह ना तो गुणवत्तापूर्ण था, ना ही सूची के अनुसार था। उसके बाद डीपीओ द्वारा जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया, लेकिन एक माह बीतने के बाद भी जांच टीम द्वारा जांच पूरा नही करना कई सवालों को जन्म दे रहा है। सूत्रों की माने तो जांच में विलंब होने से  सप्लायर द्वारा स्कूलों में कम सामान को पूरा करने में जुटे है। आखिर जिस स्कूल में आंगनबाड़ी केंद्र चलते ही नहीं है, उस स्कूल में 30 -30 हज़ार की राशि किसके इशारे पर भेजी गई?

इसके अलावा भी कई अन्य सवाल है, जो पूछा जाना लाजिमी हैं। बिना सीडीपीओ के जनकारी के समान की खरीदारी कैसे की गई? आखिर किसके दबाव में शिक्षा समिति के खाते से चेक सप्लायर के नाम से काट दिया गया? स्कूल एचएम पर दबाव बनाने वाले दबंग दो सप्लायर कौन है? जिसके इशारे पर कार्यालय का कार्य चलता है? इस खिलौना के खेल में डीपीओ कार्यालय से लेकर बीआरसी कार्यालय तक जुड़े है? आखिर जिस विद्यालय में आंगनबाड़ी केंद्र चलते थे उस विद्यालय में राशि नही भेजकर आंगनबाड़ी केंद्र नही चलने वाले विद्यालय में कैसे राशि भेजी गई? विभागीय पत्र के अनुसार जिला के 89 विद्यालयों में आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चों के खिलौना, अलमारी, दीवार लेखन के लिए 30-30 हज़ार की राशि भेजी गई, लेकिन सूची में अंकित अधिकांस विद्यालय में आंगनबाड़ी केंद्र चलता ही नही है। जिला के कोटवा, पहाडपुर, चकिया, अरेराज सहित प्रखंडो के सीडीपीओ कार्यालय के अनुसार शिक्षा विभाग द्वारा ना ही इसकी जनकारी दी गई, और ना ही अधिकांश विद्यालय में आंगनबाड़ी केंद्र चलते हैं।

इस मामले में डीईओ संजय कुमार ने बताया कि मामला संज्ञान में आने पर तत्कालीन डीपीओ पहलाद गुप्ता द्वारा तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया गया है। जांच टीम द्वारा जांच कार्य अभी पूरा नही किया गया है।जांच कार्य मे तेजी लाने का निर्देश दिया गया है ।जांच में देरी होने पर सवाल उठना लाजमी है। जांच रिपोर्ट आने पर दोषी पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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