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समग्र तिलक परिषद के तत्वाधान में स्वामी सहजानंद सरस्वती की पुण्यतिथि पर 26 जून को विशाल संगोष्ठी का होगा आयोजन..जुटेंगे सियासी और सामाजिक दिग्गज...

समग्र तिलक परिषद के तत्वाधान में स्वामी सहजानंद सरस्वती की पुण्यतिथि पर 26 जून को विशाल संगोष्ठी का होगा आयोजन..जुटेंगे सियासी और सामाजिक दिग्गज...

पटना. स्वतंत्रता सेनानी व किसान नेता स्वामी सहजानंद सरस्वती की 74वीं पुण्यतिथि का आयोजन समग्र तिलक परिषद् के तत्वाधान में 26 जून 2024 को होगा. पटना के सरदार पटेल मार्ग स्थित जगजीवन राम संसदीय, अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान में संध्या 3 बजे बजे से आयोजित कार्यक्रम में उनके कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला जाएगा. कार्यक्रम में बिहार के विभिन्न जिलों से सियासी और सामाजिक दिग्गज जुटेंगे. समग्र तिलक परिषद के अध्यक्ष डॉ चन्द्रभूषण राय ने बताया कि भारत में किसानों आंदोलन के जनक रहे स्वामी सहजानंद सरस्वती मौजूदा दौर में भी किसानों के अधिकार के लिए उसी तरह प्रासंगिक है. 



उन्होंने कहा कि स्वामी जी भारत के किसान आंदोलन के निर्विवाद नेता थे. उन्होंने भारत में संगठित किसान आन्दोलन की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. साथ ही एक तपस्वी के रूप में अपना सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया. दंडी स्वामी सहजानन्द सरस्वती का जन्म गाजीपुर के देवा गांव में 22 फरवरी,1889 में हुआ था. स्वतंत्रता संग्राम सेनानी होने के साथ ही उन्हें किसान आंदोलन का जनक भी माना जाता है। 26 जून 1950 को उनका देहावसान हुआ था. उस दौर में महात्मा गांधी विचारों से प्रभावित होकर गांधीवादी सत्याग्रही के तौर पर राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन में जुट गए. साथ ही किसानों के लिए किए गए उनके संघर्ष आज भी प्रेरक हैं. 



उन्होंने कहा कि पहले वे सामाजिक सुधार के भूमिहार ब्राह्मण सभा में थे फिर गांधी जी के आंदोलन में आये और उसके बाद किसान और साम्यवादी आंदोलन में आये. स्वामी जी ने सरल ढंग से प्रभावशाली अंदाज में बातें की है. उनके उद्धरणों से गुजरने पर उनके राजनीतिक दर्शन से परिचित हुआ जा सकता है. स्वामी जी ने असहयोग आंदोलन से सक्रिय राजनीति में हिस्सा लिया. उनके करिश्माई व्यक्तित्व के कारण बड़ी संख्या में लोग गोलबंद हुए. आज़ादी की लड़ाई में उन्हें निर्णायक सफलता मिली. यहां तक की खादी और नशाबंदी आंदोलन में भी उन्होंने भाग लिया.



1937 के चुनाव में कांग्रेस की सफलता में किसान सभा का सहयोग सबसे प्रमुख रहा लेकिन ज़मींदारों को लेकर ही कांग्रेस और किसान सभा में मतभेद बढ़ने लगा यहां तक कि विधानसभा का भी घेराव किया गया. स्वामी जी फासिज़्म के प्रबल विरोधी थे क्योंकि फासिज़्म कभी भी गरीब-कमज़ोर लोगों के लिए अच्छा नहीं रहा है. बहुत कम लोग ऐसे रहे हैं जो आंदोलन से जुड़े रहे हों तथा इतना ज़्यादा लिखा भी है. अंग्रेज़ी अनुवाद में उनके विचार और भी बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचे हैं. आज़ादी के बाद ज़मींदारी उन्मूलन करने वाला पहला राज्य यदि बिहार बना तो उसका सबसे बड़ा श्रेय स्वामी सहजानंद सरस्वती को जाता है लेकिन स्वामी जी सिर्फ़ राजनीतिक आज़ादी से प्रसन्न नहीं थे. वे सामाजिक-आर्थिक आज़ादी लाना चाहते थे.



डॉ चन्द्रभूषण राय ने बताया कि स्वामी सहजानंद सरस्वती के विचारों की मौजूदा दौर में भी प्रासंगिक भूमिका है. इसी को लेकर उनकी पुण्यतिथि पर आयोजन किया जा रहा है. अयोजन की सफलता के लिए समग्र तिलक परिषद के अध्यक्ष डॉ चन्द्रभूषण राय, उपाध्यक्ष डॉ दीपक कुमार, सचिव संजय कुमार, संयोजक राजकुमार सिंह, कोषाध्यक्ष अलोक कुमार, सदस्य डॉ कुमार वरुण, डा० अर्चना आदि सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. 


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