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रुपौली विधानसभा उपचुनाव के लिए हुए कुल 13 नामांकन, राजद की बीमा, जदयू के कलाधर का खेल खराब करेंगे निर्दलीय प्रत्याशी

रुपौली विधानसभा उपचुनाव के लिए हुए कुल 13 नामांकन, राजद की बीमा, जदयू के कलाधर का खेल खराब करेंगे निर्दलीय प्रत्याशी

पटना. बिहार के रुपौली विधानसभा क्षेत्र में हो रहे उपचुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तिथि खत्म होने तक कुल 13 लोगों ने पर्चा दाखिल किया है. नामांकन के अंतिम दिन जहां 7 लोगों ने अपना नामांकन किया, वहीं कुल नामांकन की संख्या 13 हो गई. निर्वाची पदाधिकारी सह डीसीएलआर विनय कुमार के अनुसार रुपौली विधानसभा उपचुनाव के लिए 15 एनआर कटाये गए थे जिसमें दो ने नामांकन नहीं किया. सिर्फ 13 लोगों ने नामांकन किया. 



नामांकन करनेवाले कुल 13 उम्मीदवार में जदयू के कलाधर मण्डल,राजद की बीमा भारती, राष्ट्रीय जन संभावना पार्टी के चंद्रदीप सिंह,भारतीय सार्थक पार्टी के राजीव कुमार,आजाद समाज पार्टी के रवि रौशन, निर्दलीय प्रत्याशी के रूप मे शंकर सिंह,लालू प्रसाद यादव,अरविंद प्रसाद सिंह,नीलम देवी, सिंघियान निवासी शंकर सिंह, मो शादाब आजम,खगेश कुमार, दीपक कुमार शामिल हैं. वहीं एनआर कटाने वाले अवधेश कुमार मण्डल व शाहिला वसीम अनुपस्थित रहे.



10 जुलाई को मतदान  :रुपौली में 10 जुलाई को मतदान होना है. नामांकन पत्रों की जांच 24 जून को होगी.  26 जून तक नामांकन वापस ले सकेंगे. मतदान 10 जुलाई व 13 जुलाई को मतगणना होगी. रुपौली में बीमा भारती ने वर्ष 2020 में जदयू के टिकट पर चुनाव जीता था. लेकिन इसी वर्ष जदयू से रिश्तों में तल्खी आने के बाद बीमा ने जदयू ने नाता तोड़ लिया और विधायक पद से इस्तीफा दे दिया. बाद में उन्हें राजद ने पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया लेकिन उनकी करारी हार हुई. त्रिकोणीय मुकाबले में निर्दलीय पप्पू यादव ने चुनाव जीता जबकि जदयू के संतोष कुशवाहा दूसरे नम्बर पर रहे. वहीं बीमा भारती तीसरे नम्बर पर रही. 



निर्दलीय प्रत्याशी देंगे चुनौती : रुपौली विधानसभा उपचुनाव में मुख्य मुकाबला जिन दो राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के बीच है उसमें जदयू के कलाधर मण्डल और राजद की बीमा भारती हैं. लेकिन यहां दोनों को कड़ी चुनौती निर्दलीय प्रत्याशी शंकर सिंह से मिल सकती है. पूर्व विधायक शंकर सिंह ने 15 जून को बागी तेवर अपनाते हुए चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रा) से इस्तीफा दे दिया था. माना जाता है कि  रुपौली के सवर्ण जाति के वोटरों पर शंकर सिंह जबकि इलाके की महिला वोटरों पर उनकी पत्नी प्रतिमा कुमारी की गहरी पैठ है. शंकर सिंह ने 2005 में लोजपा के टिकट पर चुनाव जीता था. बाद में 2010, 2015 और 2020 में पार्टी ने चुनाव लड़ाया लेकिन सभी चुनावों में वे मामूली वोटों के अंतर से पिछड़ गये. 



एनडीए से मिला धोखा : हालिया संपन्न पूर्णिया लोकसभ चुनाव में भी एनडीए समर्थित जदयू प्रत्याशी संतोष कुशवाहा रुपौली में बढ़त बनाने में सफल रहे थे. शंकर सिंह का दावा है कि यह इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने वहां संतोष कुशवाहा के लिए मतदाताओं को गोलबंद किया. अब विधानसभा उपचुनाव आया तो जदयू ने NDA से कलाधर मंडल को टिकट दे दिया गया. ये वही कलाधर मंडल हैं जो मुखिया का चुनाव भी नहीं जीत सके. शंकर कहना है कि लोजपा (रा) ने उनके साथ धोखा किया और अब वे निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे हैं. शंकर सिंह के चुनाव मैदान में उतरने से जदयू और राजद दोनों को अब त्रिकोणीय मुकाबले का सामना करना पड़ सकता है. 


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